करीब डेढ़ दशक तक पुलिस के लिए पहेली बने रहे सीरियल किलर मोनू कुमार को चंडीगढ़ जिला अदालत ने तीसरे दुष्कर्म व हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मंगलवार को अदालत ने साल 2024 में 60 वर्षीय महिला की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में मोनू को उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इससे पहले मोनू को 2010 में 21 वर्षीय एमबीए छात्रा और 2022 में 40 वर्षीय महिला की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में उम्रकैद हो चुकी है।
तीनों मामलों की कड़ी जोड़ने में वैज्ञानिक साक्ष्यों और खासकर डीएनए जांच ने अहम भूमिका निभाई। 2010 का मामला करीब 14 साल तक अनसुलझा रहा। संरक्षित फोरेंसिक साक्ष्यों की दोबारा जांच से मिले डीएनए सुराग के बाद पुलिस मोनू तक पहुंची और 2 मई 2024 को उसे गिरफ्तार किया।
पहले से हिरासत में था मोनू, पूछताछ में खुला 60 वर्षीय महिला की हत्या का राज
27 फरवरी 2024 की शाम मोहाली निवासी 60 वर्षीय महिला अचानक लापता हो गई थी। उसके पति के मुताबिक, वह करीब साढ़े छह बजे घर लौटे तो पत्नी घर पर नहीं थी। रातभर तलाश के बाद अगले दिन सुबह मोहाली पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसी दौरान सेक्टर-54 में सरकारी स्कूल के पास जंगल में एक राहगीर ने महिला का शव पड़ा देखा। जांच में सामने आया कि महिला करीब ढाई महीने पहले यूपी स्थित अपने पैतृक गांव से चंडीगढ़ आई थी।
पुलिस के मुताबिक, महिला मलोया-सेक्टर-54 के पास सुनसान रास्ते से जा रही थी तभी मोनू ने उसे पकड़ लिया। आरोप है कि मारपीट और दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसका मोबाइल फोन और चांदी की पायल चोरी कर ली। इस वारदात के समय मोनू पहले से ही एक अन्य दुष्कर्म व हत्या मामले में हिरासत में था। पूछताछ के दौरान उसने 60 वर्षीय महिला की हत्या और पायल चोरी की बात कबूल की। पुलिस ने इसके बाद अन्य साक्ष्य जुटाकर मामला अदालत में पेश किया।
14 साल बाद डीएनए से खुला 2010 का राज
2010 में सेक्टर-38 वेस्ट में 21 वर्षीय एमबीए छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी। पुलिस ने हत्यारे की तलाश में 500 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन मामला अनसुलझा रहा। संरक्षित फोरेंसिक साक्ष्यों की दोबारा जांच में जून 2023 में बड़ा सुराग मिला। 2010 के मामले और जनवरी 2022 में मलोया में हुई 40 वर्षीय महिला की हत्या से मिले जैविक साक्ष्यों की जांच में दोनों वारदातों की कड़ी एक ही व्यक्ति तक पहुंची। इसके बाद एसआईटी ने संदिग्धों के डीएनए नमूनों का मिलान कराया और मोनू का डीएनए संरक्षित साक्ष्य से मैच हो गया। इसके बाद 2 मई 2024 को उसे गिरफ्तार किया गया।
2022 की हत्या में भी मिल चुकी है उम्रकैद
जनवरी 2022 में मलोया की 40 वर्षीय सब्जी विक्रेता महिला बाजार गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन उसका शव घर से कुछ दूरी पर मिला था। जांच में यह मामला भी मोनू से जुड़ा। अदालत ने 21 अगस्त 2026 को उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं 2010 के एमबीए छात्रा हत्याकांड में अदालत ने 28 नवंबर 2025 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
पहचान छिपाकर रहता था, आधार कार्ड और बैंक खाता तक नहीं बनवाया
मोनू डड्डूमाजरा के पास शाहपुर कॉलोनी में रहता था। पुलिस के मुताबिक वह अपनी पहचान छिपाकर रहता था। उसने आधार कार्ड और बैंक खाता तक नहीं बनवाया था। वह ऑटो और इंटरसिटी टैक्सी चलाता था और अक्सर अपना ठिकाना बदलता रहता था। 2011 से 2020 के बीच चोरी और झपटमारी के सात मामले भी उसके खिलाफ दर्ज हुए।
हिमाचल में छह साल की बच्ची के रेप-मर्डर का केस भी दर्ज था
साल 2008 में हिमाचल प्रदेश के चंबा में छह साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या का मामला भी मोनू के खिलाफ दर्ज हुआ था। आरोप था कि 12 सितंबर 2008 को ढाबे पर काम करने वाली बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और हत्या कर दी। इस मामले में मोनू करीब डेढ़ साल हिमाचल की जेल में रहा लेकिन बाद में साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया।
एक नजर में अपराध की पूरी टाइमलाइन
2008: हिमाचल में छह साल की बच्ची के रेप-मर्डर का केस, बाद में साक्ष्य के अभाव में बरी।
2010: सेक्टर-38 वेस्ट में 21 वर्षीय एमबीए छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या।
2011-2020: चोरी-झपटमारी के सात मामलों में केस दर्ज।
11-12 जनवरी 2022: मालोया में 40 वर्षीय महिला की हत्या।
जून 2023: सीएफएसएल जांच में 2010 और 2022 के मामलों के जैविक साक्ष्यों की कड़ी जुड़ी।
27-28 फरवरी 2024: 60 वर्षीय महिला की हत्या।
2 मई 2024: डीएनए मैच के बाद मोनू गिरफ्तार।
28 नवंबर 2025: 2010 के एमबीए छात्रा हत्याकांड में उम्रकैद।
21 अगस्त 2026: 2022 के मामले में उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना।
14 सितंबर 2026: 60 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में दोषी करार।
15 सितंबर 2026: तीसरी उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा।