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राजनीतिक विवाद: जुर्म की दुनिया से सियासत तक, गैंगस्टरवाद बनेगा चुनावी मुद्दा; आप में इनकी एंट्री पर घमासान

Sat, 12 Sep 2026 10:36 AM IST
Sharukh Khan मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में गैंगस्टरवाद चुनावी मुद्दा बनेगा। कुछ सियासी दलों में पूर्व गैंगस्टरों और उनके रिश्तेदारों की एंट्री पर भी घमासान मचा है। सियासत के जानकारों का मानना है कि जुर्म की दुनिया से सियासत तक का मुद्दा इस बार चुनाव के दौरान पूरी तरह गरमाएगा। 
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Chandigarh Politics - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जुर्म की दुनिया से परे अब कुछ पूर्व गैंगस्टर सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इनके रिश्तेदार भी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं।
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राजनीति में इन लोगों की एंट्री को लेकर सूबे में सियासी घमासान मचा हुआ है। वहीं, सियासत के जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा इस बार चुनाव के दौरान पूरी तरह गरमाएगा। कुछ सियासी दलों में इन लोगों की एंट्री के बाद अन्य दलों के नेताओं ने इनकी घेराबंदी भी शुरू कर दी है।

इस वक्त सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद जीरा हलके से गुरप्रीत सेखों की आम आदमी पार्टी में एंट्री को लेकर छिड़ा हुआ है। फिरोजपुर के मुदकी क्षेत्र से जुड़े गुरप्रीत सिंह सेखों का अतीत आपराधिक मामलों के कारण चर्चा में रहा है। 
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उनके खिलाफ अलग-अलग समय में कई मामले दर्ज रहे। 2016 के नाभा जेल ब्रेक मामले में भी उनका नाम प्रमुख आरोपियों में रहा और 2023 में उन्हें अदालत से जमानत मिली। इसके बाद सेखों ने सामाजिक गतिविधियों के जरिये अपनी सार्वजनिक छवि बदलने की कोशिश की।

 

पहले अकाली दल से नजदीकी रही और फिर 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी की। छह सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। इसी मुद्दे पर विरोधी दलों के नेता आप को निशाने पर लिए हुए हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान आम आदमी पार्टी में सेखों की एंट्री पर कह चुके हैं कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसके अतीत के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

परिस्थितियां कई बार व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जाती हैं, लेकिन अगर कोई अपना रास्ता बदलकर मुख्यधारा और सार्वजनिक जीवन में लौटना चाहता है तो उसे अवसर दिया जाना चाहिए। सेखों की पत्नी मंदीप कौर और करीबी रिश्तेदार कुलजीत कौर ने भी वर्ष 2025 में जिला परिषद चुनाव जीते थे।

लक्खा मौड़ सीट से लक्खा सिढाना मैदान में
सेखों के अलावा कुछ और नाम भी इस बार चर्चा में हैं। लखबीर सिंह उर्फ लक्खा सिढाना पर कई मामले दर्ज रहे हैं। वह एक समय अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा, लेकिन बाद में उसने खुद को सामाजिक मुद्दों और मालवा क्षेत्र में युवाओं से जुड़े अभियानों के जरिये एक्टिविस्ट के रूप में स्थापित किया। 

 

26 जनवरी 2021 के लाल किला घटनाक्रम के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। अब अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने उसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए मौड़ सीट से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है।

भगवानपुरिया की मौसी चुनाव लड़ने की इच्छुक
इसी तरह गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया की मौसी भी डेरा बाबा नानक से चुनाव लड़ने की इच्छुक हैं। वह अभी ब्लॉक समिति की अध्यक्ष हैं। पूर्व गैंगस्टर रॉकी की बहन भी वर्तमान में फाजिल्का में राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय हैं।

पिछली बार उन्होंने आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, मगर हार मिली। इसी तरह कुछ अन्य पूर्व गैंगस्टर और उनके रिश्तेदार भी इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

पंजाब में गैंगस्टरवाद बड़ा मुद्दा: परमजीत
राजनीतिक मामलों के माहिर परमजीत सिंह बताते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में गैंगस्टरवाद कानून-व्यवस्था के साथ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। पुलिस लगातार गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है, लेकिन हत्या, रंगदारी, हथियार और विदेश में बैठे गैंग नेटवर्क से जुड़ी खबरें इसे चुनावी बहस में बनाए हुए हैं। 

 
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विदेशों में बैठे गैंगस्टरों को लेकर खौफ बढ़ रहा है। सीमाओं के पार से ड्रोन के जरिये हथियार और ड्रग्स की तस्करी गैंगस्टर नेटवर्क को और मजबूत कर रही है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दल मौजूदा सरकार को घेर रहे हैं, जिससे यह सीधे चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है।
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