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चंडीगढ़ में ऊंचाई की नई उड़ान: सेक्टर-30 के पार उठेंगी ऊंची इमारतें, सेक्टर-1 से 30 तक विरासत सुरक्षित

Fri, 18 Sep 2026 12:45 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मौलीजागरां, शिवालिक एन्क्लेव और पंचकूला सेक्टर-18 के आसपास विकसित हाउसिंग बोर्ड पॉकेट्स में प्रशासक की अंतिम मंजूरी के बाद स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवन बनाने की अनुमति मिल सकेगी।
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आवासीय योजना - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ में अब सेक्टर-30 के बाद के इलाकों में बहुमंजिला आवासीय विकास का रास्ता खुलने जा रहा है। फेज-2 के नए सरकारी फ्लैटों में स्टिल्ट पार्किंग और कुछ हाउसिंग बोर्ड पॉकेट्स में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिल की अनुमति का प्रावधान मास्टर प्लान-2031 के संशोधन ड्राफ्ट में मंजूर किया गया है। 

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साथ ही औद्योगिक इमारतों का एफएआर बढ़ाकर 2 करने का प्रावधान भी स्वीकृत हुआ है। वीरवार को मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में हुई चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की बैठक में ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को भेजा जाएगा।

फेज-1 यानी सेक्टर-1 से 30 तक मौजूदा स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं हाईराइज इमारतों और ज्यादा एफएआर के व्यापक प्रावधान लागू करने से पहले मौजूदा सड़क, पार्किंग, सीवर, पानी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता की स्टडी कराई जाएगी। स्टडी के आधार पर ही आगे का विकास तय होगा।

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तीन क्षेत्रों में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिल
मौलीजागरां, शिवालिक एन्क्लेव और पंचकूला सेक्टर-18 के आसपास विकसित हाउसिंग बोर्ड पॉकेट्स में प्रशासक की अंतिम मंजूरी के बाद स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवन बनाने की अनुमति मिल सकेगी। फेज-2 के अन्य सेक्टरों में स्टिल्ट पार्किंग का प्रावधान केवल नए बनने वाले सरकारी फ्लैटों के लिए होगा।

215 एकड़ जमीन पर आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित
मास्टर प्लान संशोधन में फेज-2 और फेज-3 में हाईराइज हाउसिंग, हाई डेंसिटी ग्रुप हाउसिंग और मिक्स्ड लैंड यूज कॉरिडोर विकसित करने का प्रावधान है। करीब 215 एकड़ जमीन पहले ही चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को आवासीय परियोजनाओं के लिए आवंटित की जा चुकी है, लेकिन अब तक विकसित नहीं हुई। फेज-3 में करीब 146 एकड़ खाली जमीन और बाहरी हिस्सों की अन्य रिक्त जमीन पर भी बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं का प्रस्ताव है।

इंडस्ट्री का एफएआर होगा 2
औद्योगिक भवनों के लिए एफएआर 2.0 करने का प्रावधान भी मंजूर किया गया है। दो कनाल तक के भूखंडों पर 60 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज और अधिकतम 68 फीट 3 इंच ऊंचाई की अनुमति का प्रावधान है। दो कनाल से बड़े भूखंडों पर भी एफएआर 2 और 60 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज होगी। यह आर्किटेक्चरल कंट्रोल और जोनिंग के तहत आने वाली दोनों तरह की इंडस्ट्री पर लागू होगा।

हाईराइज से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच
मल्टीस्टोरी कॉन्सेप्ट के तहत अधिक ऊंचाई और एफएआर वाली इमारतों के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा के अनुसार मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता की स्टडी के बाद ही आगे विकास तय होगा। मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद के अनुसार सेक्टर-1 से 30 तक फेज-1 की हेरिटेज पहचान और मूल नियोजित स्वरूप सुरक्षित रहेगा। कैपिटल कॉम्प्लेक्स और मूल आर्किटेक्चरल कैरेक्टर में बदलाव नहीं किया जाएगा।
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