चंडीगढ़ के डीसी निशांत यादव ने समुद्र तल से करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन पूरी की। लद्दाख मैराथन को ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण दौड़ों में गिना जाता है।
चंडीगढ़ के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ फिटनेस के प्रति जागरूकता की मिसाल पेश की है। उन्होंने समुद्र तल से करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर आयोजित लद्दाख मैराथन में 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन पूरी की। ऊंचाई वाले क्षेत्र में कम ऑक्सीजन, पतली हवा और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूभाग के बीच दौड़ पूरी करना अपने आप में कठिन उपलब्धि मानी जाती है।
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लद्दाख की ऊंचाई पर सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है। ऐसे में लंबे समय तक दौड़ते हुए सांस और गति को नियंत्रित रखना धावकों के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्र का भूगोल और मौसम भी दौड़ को और कठिन बना देता है। इन परिस्थितियों के बावजूद निशांत कुमार यादव ने लगातार दौड़ते हुए 21.1 किलोमीटर की दूरी पूरी की।
प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ फिटनेस का संदेश
उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद की व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच मैराथन में हिस्सा लेना फिटनेस के प्रति उनकी सक्रियता को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि को युवाओं और आम लोगों के लिए भी प्रेरक माना जा रहा है। इससे यह संदेश मिलता है कि व्यस्त दिनचर्या के बीच भी स्वास्थ्य और शारीरिक सक्रियता के लिए समय निकाला जा सकता है।
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चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हासिल किया लक्ष्य
लद्दाख मैराथन को ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण दौड़ों में गिना जाता है। यहां हिस्सा लेने वाले धावकों को कम ऑक्सीजन के साथ अपने शरीर को संतुलित रखते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे वातावरण में 21.1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है।
मैराथन पूरी करने के बाद निशांत कुमार यादव ने इसे विशेष अनुभव बताया। उन्होंने दौड़ के दौरान के अनुभव और तस्वीरें भी साझा कीं। उनकी उपलब्धि को लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता, अनुशासन और फिटनेस के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।