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चंडीगढ़ पुलिस को बड़ा तोहफा: आवास की कमी होगी दूर, धनास में बनेंगे 192 नए घर; किन्हें मिलेगा लाभ

Tue, 11 Aug 2026 10:33 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रस्तावित आवासों में टाइप-3 श्रेणी के तीन कमरों वाले फ्लैट शामिल होंगे। इनका आवंटन मुख्य रूप से सहायक उप निरीक्षक और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को किया जाएगा।  
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आवासीय योजना - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। धनास स्थित पुलिस कॉलोनी में 192 नए फ्लैट बनाने की योजना तैयार की गई है। 

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परियोजना की अनुमानित लागत करीब 64 से 65 करोड़ रुपये रखी गई है। निर्माण के लिए तीन कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया है और फिलहाल इंजीनियरिंग विभाग इनके दस्तावेजों और तकनीकी प्रस्तावों की जांच कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र कंपनी का चयन किया जाएगा। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण अंतिम निर्माण लागत अनुमान से कम रहने की भी संभावना है। नए आवासों के लिए जमीन पहले ही तय की जा चुकी है।
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जरूरत के हिसाब से तैयार हुआ डिजाइन
परियोजना का खाका तैयार करने से पहले इंजीनियरिंग विभाग ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की थी। पुलिसकर्मियों की आवासीय जरूरतों, परिवार के साथ रहने की सुविधा और उपलब्ध स्थान को ध्यान में रखते हुए परिसर का डिजाइन तैयार किया गया है। परियोजना का नक्शा भी तैयार हो चुका है।

प्रस्तावित आवासों में टाइप-3 श्रेणी के तीन कमरों वाले फ्लैट शामिल होंगे। संभावना है कि इनका आवंटन मुख्य रूप से सहायक उप निरीक्षक और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को किया जाएगा। नए परिसर में मौजूदा सरकारी आवासों की तुलना में बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा।

पहले से 800-1000 सरकारी आवास
धनास पुलिस कॉलोनी में विभिन्न श्रेणियों के पहले से करीब 800 से 1000 फ्लैट मौजूद हैं। इसके बावजूद पुलिस बल में आवास की मांग बनी हुई है। नए 192 फ्लैट तैयार होने के बाद सरकारी आवास पाने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ेगी। इससे किराये के मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

परिवार के साथ रहने और ड्यूटी में भी फायदा
पुलिसकर्मियों के लिए सरकारी आवास उपलब्ध होने का असर उनकी ड्यूटी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ड्यूटी स्थल के आसपास रहने से आने-जाने में समय कम लगेगा। किसी आपात स्थिति या कानून-व्यवस्था से जुड़ी जरूरत के दौरान कर्मचारियों को कम समय में बुलाया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर आवासीय सुविधा से पुलिसकर्मियों के परिवारों को स्थायित्व मिलने के साथ उनका मनोबल भी बढ़ेगा।
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परियोजना की अगली प्रक्रिया
तकनीकी जांच पूरी होने के बाद टेंडर का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद चयनित एजेंसी को निर्माण कार्य सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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