रावी से रणजीत सागर डैम में आया 14.11 लाख क्यूसेक पानी
गोयल ने कहा कि 1988 में रावी नदी में 11.20 लाख क्यूसेक पानी था, जबकि इस साल यह 14.11 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है। इसमें रणजीत सागर डैम से लगभग 2.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था जबकि बाकी बहाव हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और पंजाब की खड्डों, नालों और कैचमेंट क्षेत्रों से आया। पानी के इस बढ़े हुए बहाव के कारण रावी में आई बाढ़ ने सीधे तौर पर तीन जिलों को प्रभावित किया, जबकि ब्यास और सतलुज नदियों से आई बाढ़ के कारण चार और जिले पानी की चपेट में आ गए, जिसमें खड़ी फसलें, पशु और लोगों के घरों का भारी नुक़सान हुआ।
11330 लोगों को बचाकर राहत कैंपों में पहुंचाया
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से समय रहते लोगों को बाढ़ वाले इलाकों से बाहर निकालकर उकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। 11,330 से अधिक लोगों को बचाकर राज्य सरकार द्वारा स्थापित किए गए 87 राहत कैंपों में भेजा गया, जहां उन्हें भोजन, आश्रय और चिकित्सीय देखभाल प्रदान की गई है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमों की सहायता से लगभग 110 व्यक्तियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से हवाई जहाज के माध्यम से बाहर निकाला गया।
पशुओं को बचाकर मार्केट कमेटी के शेडों पर रखा
फिरोजपुर और फाजिल्का के प्रभावित इलाकों में पशुओं को मार्केट कमेटी शेडों और राहत आश्रयों में रखा गया है, जहां सरकार और समाज सेवी संगठनों की ओर से बड़ी मात्रा में चारा उपलब्ध कराया गया है। हमारी सरकार की ओर से पशुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि इंसानों की तरह पशु मदद की गुहार नहीं लगा सकते।
विपक्षी दलों को दिया ये जवाब
विपक्षी दलों के बयानों का जवाब देते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि यह आरोप लगाने का समय नहीं है, बल्कि मिलकर राज्य के लिए काम करने का समय है। उन्होंने सभी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे पार्टी हितों से ऊपर उठकर राहत कार्यों में पूरा सहयोग दें। उन्होंने राज्यों को नुकसान का आकलन करने और राष्ट्रीय आपदा कोष से मुआवज़ा बांटने संबंधी अधिकार देने की जरूरत पर भी जोर दिया क्योंकि राज्य ही हुए नुकसान की जमीनी हकीकतों से केंद्र के मुकाबले ज़्यादा जानते हैं।