सीएम ने बात की, भरोसा दिया था
सैनिक की पत्नी ने कहा- 3-4 दिन पहले मेरी सीएम (ममता बनर्जी) से भी बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि आपके पति जल्द घर आ जाएंगे, क्योंकि वह भी बीएसएफ के अधिकारियों से लगातार बात कर रही थीं। सभी का सपोर्ट रहा। पूरा देश मेरे लिए खड़ा था। मैं सभी का धन्यवाद करती हूं।
मोदी है तो मुमकिन है
रजनी ने कहा- मोदी जी हैं तो सब मुमकिन है। 22 अप्रैल को पहलगाम में अटैक हुआ तो उन्होंने 15-16 दिन के भीतर ही ऑपरेशन सिंदूर चलाकर उन सभी का बदला लिया, जिनके सुहाग आतंकियों ने उजाड़े। उसके 3-4 दिन बाद ही उन्होंने मेरा सुहाग वापस कर दिया। उन्हें मैं धन्यवाद देना चाहती हूं। बीएसएफ ने कॉन्स्टेबल पूर्णम के भारत लौटने की जानकारी दी है। इसमें बताया कि पूर्णम शॉ 23 अप्रैल को फिरोजपुर सेक्टर में ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान गलती से पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था।
पहलगाम हमले के अगले दिन पाकिस्तान ने पीके शॉ को पकड़ा था
पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमले के अगले दिन पाकिस्तान रेंजर्स ने बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ की दो फोटो जारी की थी। पहली फोटो में पूर्णम पेड़ के नीचे खड़े थे। उनकी राइफल, पानी की बोतल, बैग जमीन पर पड़ा था। दूसरी फोटो में जवान की आंखों पर पट्टी बंधी थी।
बीएसएफ कांस्टेबल पीके शॉ
- फोटो : संवाद
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं शॉ
जवान शॉ मूल रूप से पश्चिम बंगाल में हुगली के रिसड़ा गांव के रहने वाले हैं। वह 23 अप्रैल को फिरोजपुर में किसानों के साथ भारत-पाक बॉर्डर पर ड्यूटी कर रहे थे। इस दौरान वह गलती से एक पेड़ के नीचे बैठने के लिए पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए। जहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ ले गए।
जानें कब क्या हुआ
श्रीनगर से आई बीएसएफ की 24वीं बटालियन फिरोजपुर के ममदोट सेक्टर में तैनात हुई थी। 23 अप्रैल की सुबह किसान अपनी कंबाइन मशीन लेकर खेत में गेहूं काटने गए थे। यह खेत भारत-पाक बॉर्डर पर फेंसिंग पर लगे गेट नंबर-208/1 के पास जीरो लाइन पर था। किसानों की निगरानी के लिए बीएसएफ के 2 जवान भी उनके साथ थे। इसी समय जवान पीके शॉ की तबीयत बिगड़ गई। वह पेड़ के नीचे बैठने के लिए चले गए। पेड़ बॉर्डर पार था। तभी पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें घेरकर पकड़ लिया और उनके हथियार भी छीन लिए।
बीएसएफ अफसर मौके पर पहुंचे, छोड़ने से इनकार किया
जैसे ही बीएसएफ के बड़े अफसरों को जवान पीके शॉ के पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा पकड़े जाने की खबर मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पाकिस्तान रेंजर्स से बातचीत शुरू की। उन्हें बताया गया है कि यह जवान कुछ दिन पहले ट्रांसफर होकर आया था। उसे जीरो लाइन का पता नहीं था। वह गलती से जीरो लाइन क्रॉस कर गया था। उसे रिहा करने के लिए कहा गया, मगर पाकिस्तानी रेंजर्स ने इनकार कर दिया।
3 फ्लैग मीटिंग हुई, कोई नतीजा नहीं निकला
जवान पीके शॉ की रिहाई के लिए भारत की ओर से लगातार फ्लैग मीटिंग के जरिए कोशिश की गई। इसे लेकर 2 से 3 फ्लैग मीटिंग भी हुईं, लेकिन जवान की रिहाई की बात नहीं बनी। तब बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल (डीजी) दलजीत सिंह चौधरी ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से इस बारे में बातचीत की, लेकिन बात नहीं बन पाई।
गर्भवती पत्नी भी फिरोजपुर पहुंची थी
28 अप्रैल को बीएसएफ जवान की गर्भवती पत्नी रजनी पश्चिम बंगाल से फिरोजपुर पहुंची थीं। यहां उन्होंने बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की। वह 2 दिन फिरोजपुर में रुकी भी रहीं। हालांकि उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें वापस भेजा गया।