बीते दिनों पंजाब के बठिंडा में पुलिस और किसानों के बीच हुई झड़प के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। पुलिस के लाठीचार्ज में कई किसान घायल हुए थे। इसके विरोध में भाकियू एकता उगराहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने सरकार को चेतावनी दी है।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) एकता उगराहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने बठिंडा के गांव ज्यौंद में पुलिस की कार्रवाई पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने गांव में घुसकर किसानों को निशाना बनाया, जिसमें किसान चरणजीत सिंह (गांव माड़ी) की टांग बुरी तरह तोड़ दी गई जिसे लुधियाना भर्ती कराया गया है। उगराहां ने सरकार को चेतावनी भी दी है। पुलिस की इस कार्रवाई को अमानवीय करार देते हुए कहा कि अब इस जुल्म के खिलाफ कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी आर-पार का मोर्चा खोला जाएगा। उगराहां रविवार को सुनाम में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उगराहां ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस की नाकाबंदी झेलना तो फिर भी बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन गांव में घुसकर किसानों पर हमला करना गैर-लोकतांत्रिक और शर्मनाक है। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि किसानों को सबक सिखाने की यह सोच अकेले पुलिस की नहीं बल्कि सरकार का इशारा है। सरकार पुलिस का दुरुपयोग कर आंदोलन को दबाना चाहती है, लेकिन वे भूल रहे हैं कि दमन से आवाजें और बुलंद होती हैं।
दुकानदारों और मजदूरों से लामबंदी की अपील
बीकेयू अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि जत्थेबंदी फिलहाल अपनी ताकत को और संगठित कर रही है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार एक मंच पर आएं। सभी किसान संगठनों को भी आपसी मतभेद भुलाकर एक होना होगा। उन्होंने कहा कि जो किसान या मजदूर अब तक सीधे तौर पर आंदोलन से नहीं जुड़े थे, पुलिसिया बर्बरता के बाद उनमें भी सत्ता के खिलाफ भारी आक्रोश है।
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अब जीने का औचित्य क्या?
उगराहां ने चेताया कि जब अत्याचार घरों की दहलीज तक पहुंच जाए तो चुप बैठना मौत के समान है। उन्होंने कहा कि किसानों के मन में असुरक्षा और असंतोष का जो बीज बोया है, उसका 'सेक' (ताप) अब सत्ताधारियों को झेलना ही होगा।