केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने 22 अक्तूबर को नई दिल्ली में यह बयान देते हुए दावा किया था कि पंजाब में एनडीए की सरकार बनेगी। उनके इस दावे के बाद से सूबे में भाजपा के राजनीतिक सहयोगी के संदर्भ में सियासी हलचल खासी तेज हो गई है। अब यह तो तय है कि पंजाब के चुनावी रण में भाजपा किसी सहयोगी के साथ ही आगे बढ़ेगी, लेकिन यह सहयोगी कौन होगा, इसके पत्ते अभी खुलने बाकी हैं।
पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल (बादल) इस गठबंधन के प्रति खासी बेताब दिख रही है। उसके कई नेताओं ने विभिन्न मंचों पर इस बात के खुलकर संकेत भी दिए हैं, लेकिन भाजपा के साथ चलने वाला अकाली दल कौन-सा होगा, यह अभी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने तय करना है। इसी सियासी हलचल के बीच पार्टी सूत्रों ने बताया कि सितंबर 2025 में शिरोमणि अकाली दल (बादल) से अलग हुए नए धड़े शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने पिछले दिनों भाजपा हाईकमान को अपना एक ब्लूप्रिंट सौंपा है।
पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह इस धड़े के प्रदेशाध्यक्ष हैं और कई ऐसे वरिष्ठ व टकसाली अकाली नेता इस दल से जुड़े हुए हैं, जिनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध हैं। बताया जा रहा है कि यह ब्लूप्रिंट पंजाब के उन मसलों से संबंधित है, जिन पर पुनर सुरजीत दल भाजपा का स्पष्ट रुख जानना चाहता है। सूत्र बताते हैं कि यह कवायद अकाली दल (पुनर सुरजीत) और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन की दिशा में एक अहम कदम है। इस ब्लूप्रिंट में सिख पंथ से संबंधित कुछ मुद्दे, बंदी सिखों की रिहाई, पंजाब की राजधानी और पानी के मसलों समेत सूबे से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं।
भाजपा का हिंदू-सिख फॉर्मूला
भाजपा सूबे में हिंदू-सिख एकता के फॉर्मूले के साथ ही चुनाव में आगे बढ़ना चाहती है इसलिए भाजपा को एक ऐसे धड़े की जरूरत है, जिसकी पंजाब में पंथक, खासकर सिख मतदाताओं पर अच्छी पकड़ हो। इसके एक मजबूत विकल्प के रूप में भाजपा शिअद (पुनर सुरजीत) को भी देखते हुए आगे बढ़ रही है। हालांकि, चर्चाएं शिरोमणि अकाली दल (बादल) गुट को लेकर भी चल रही हैं। बादल गुट ही पहले भाजपा के साथ चुनाव लड़ता रहा है, लेकिन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था। वर्ष 2022 के विधानसभा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़े थे।
2022 में शिअद (संयुक्त) के साथ थी भाजपा
पंजाब में 2022 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) और सुखदेव सिंह ढींडसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ मिलकर लड़ा था। भाजपा ने 65, पीएलसी को 37 और अकाली दल (संयुक्त) को 15 सीटें दी थीं। अकाली दल (संयुक्त) सुखदेव सिंह ढींडसा ने बनाया था। वह अकाली दल से अलग हुए थे। गठबंधन चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सका। भाजपा को केवल दो सीटें मिलीं, जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी और अकाली दल (संयुक्त) का खाता भी नहीं खुला था।
गठबंधन को तैयार सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, हमारे लिए पंजाब के हित सर्वोपरि हैं। अकाली दल की विचारधारा और कार्यक्रमों से सहमत होने वाली अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन के विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हमारी दुश्मन पार्टियां हैं।