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Sukhbir Badal: बाजू में सीधे लगे खंजर से हड्डी में फ्रेक्चर, 150 टांके लगे; मजीठिया बोले-चढ़दी कलां में हैं

Fri, 14 Aug 2026 11:56 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में एक व्यक्ति ने कृपाण से हमला किया था। सुखबीर के हाथ में चोट लगी जबकि बचाने की कोशिश में एक पुलिस अधिकारी भी घायल हुआ। 
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सुखबीर पर अटैक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नांदेड़ में तख्त साहिब परिसर में हमले में घायल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को करीब 150 टांके लगे हैं।

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अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया कि हमलावर ने बेहद करीब से वार किया और उसका निशाना सुखबीर बादल का दिल था, लेकिन गुरु साहिब की कृपा से वह बाल-बाल बच गए। खंजर उनकी बाजू से होकर निकल गया, जिससे हड्डी में फ्रैक्चर हुआ और उन्हें करीब 150 टांके लगाए गए।

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खतरे से बाहर हैं सुखबीर

मजीठिया ने कहा कि सुखबीर बादल अब खतरे से बाहर हैं और चढ़दी कलां में हैं। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान पुलिस कर्मचारी भी घायल हुआ था, जिसकी सर्जरी की गई है। दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।


 
अकाली नेता ने हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारे में सुखबीर बादल पर उनकी बेटियों और बहनों के सामने हमला किया जाना बेहद शर्मनाक और कायरतापूर्ण है। उन्होंने कहा कि निहत्थे व्यक्ति पर इस तरह वार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

मजीठिया के मुताबिक, परिवार ने हरसिमरत कौर बादल सहित तख्त साहिब पर अखंड पाठ साहिब का भोग डालकर गुरु साहिब का शुकराना किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हमले पर खुशी जताई या इसे जायज ठहराने की कोशिश की, वे हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।

दरबार साहिब और नांदेड़ हमलों की एनआईए जांच की मांग

मजीठिया ने बताया कि शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ लीडरशिप ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध करने का फैसला किया है कि दरबार साहिब में 2024 और नांदेड़ में 2025 के हमलों की एनआईए से फास्ट-ट्रैक जांच करवाई जाए।

उन्होंने दावा किया कि दोनों मामले मल्टी-स्टेट और क्रॉस-बॉर्डर कनेक्शन से जुड़े हो सकते हैं और साजिश की तह तक पहुंचने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है। अकाली नेतृत्व का कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे मौजूद साजिशकर्ताओं तक पहुंचना जरूरी है, ताकि भविष्य में गुरुद्वारों में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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