कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एफआईआर के अनुसार याची पारदर्शी पॉलिथिन में दो किलो अफीम लेकर जा रहा था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की कहानी विश्वास करने योग्य प्रतीत नहीं होती।
एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कोई समझदार या विवेकशील व्यक्ति पारदर्शी पॉलीथीन बैग में 2 किलोग्राम प्रतिबंधित नशा लेकर खुलेआम नहीं घूमेगा।
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कोर्ट ने कहा कि आरोपी 2 साल 10 महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहा और मई 2023 में आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष के कुल 13 गवाहों में से केवल 05 गवाहों से ही पूछताछ की गई।
मोहाली निवासी सुरेश चंद्र ने दलील दी कि उसे इस मामले में फंसाया गया है और याचिकाकर्ता के कब्जे से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। याचिका का विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि बरामद की गई नशे की कुल मात्रा 2 किलो 600 ग्राम थी। इतनी बड़ी मात्रा में अफीम वाणिज्य श्रेणी में आती है। ऐसे में याची को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि जमानत देना एक सामान्य नियम है
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और किसी व्यक्ति को जेल या सुधार गृह में रखना एक अपवाद है।
कोर्ट ने कहा कि अभियुक्तों को सांविधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एफआईआर के अनुसार याची पारदर्शी पॉलिथिन में दो किलो अफीम लेकर जा रहा था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की कहानी विश्वास करने योग्य प्रतीत नहीं होती। ऐसे में कोर्ट को संभावना है कि याची दोषी न हो। ऐसे में उसे जमानत देना अनुचित