लोकसभा सदस्य अमृतपाल सिंह नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) लगने के बाद डिब्रूगढ़ जेल में भेजे जाने के बाद पहली बार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े और संसद में अपने क्षेत्र के मुद्दों को उठाने की अनुमति मांगी। वकीलों के नो वर्क घोषित करने के चलते सुनवाई के दौरान उसने खुद पेश होकर कहा कि वह शपथपत्र देने को तैयार है कि तय तीन मुद्दों के अतिरिक्त किसी विषय पर नहीं बोलेगा। पंजाब सरकार व अन्य वकीलों के पेश न होने के चलते हाईकोर्ट ने सुनवाई बुधवार के लिए तय कर दी है।
मंगलवार को सुनवाई आरंभ होते ही अमृतपाल वीसी के जरिये डिब्रूगढ़ जेल से सफेद कुर्ता और नीली पगड़ी पहने पेश हुए। उन्होंने अंग्रेजी व पंजाबी दोनों भाषाओं का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का दायित्व निभाना चाहते हैं। अपने क्षेत्र में बाढ़, नशा व फर्जी एनकाउंटर विषय पर वह संसद में बोलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी अन्य विषय पर नहीं बोलेंगे इसकी वह अंडरटेकिंग दे सकते हैं। अमृतपाल के वीसी के जरिये पेश होने पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार का पक्ष सुनना इस मामले में बेहद जरूरी है।
वकीलों के काम न करने के चलते पंजाब सरकार की ओर से पेश होने वाले वकील मौजूद नहीं थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई को दोपहर बाद तय कर दिया और पंजाब सरकार के वकील का इंतजार करने का फैसला लिया। दोपहर बाद सुनवाई शुरू हुई तो पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि वह बार एसोसिएशन द्वारा तय प्रस्ताव के साथ हैं और इस केस में आज पेश नहीं हो सकते हैं। बार ने यह तय किया है कि सोमवार के बाद अब मंगलवार को भी कोई वकील अदालत में पेश नहीं होगा। कोर्ट ने इसके बाद सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।