दो साल से उदासीन थे राघव
करीब दो साल से पार्टी के विभिन्न मुद्दों के प्रति राघव का रवैया उदासीन दिखा। वे पार्टी व्हिप का पालन भी नहीं कर रहे थे। आप जिन मुद्दों को राज्यसभा में प्रमुखता से उठाना चाहती थी, राघव उनसे किनारा किए हुए थे, जबकि पंजाब सरकार राज्य और देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर लगातार विधानसभा में प्रस्ताव लाती रही और उन्हें चर्चा के बाद पारित करवाकर केंद्र सरकार को भेजती रही। विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात कहने और विरोध जताने का यह पंजाब सरकार का अहम तरीका था।
इसी तरह पार्टी राघव से भी यही उम्मीद कर रही थी, लेकिन वे पार्टी मुद्दों को छोड़कर अपने एजेंडों को सदन में उठा रहे थे, जो इस कार्रवाई की बड़ी वजह बनी। पार्टी के एक सीनियर नेता बताते हैं कि कई कॉमन मुद्दों पर जब राज्यसभा में वॉकआउट की स्थिति बनती थी, तो भी राघव अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से किनारा करते दिखते थे। इससे भी पार्टी की स्थिति असहज हो जाती थी।
इन मुद्दों को उठवाना चाहती थी पार्टी
आप राज्यसभा में अपने एजेंडे के तहत विभिन्न मुद्दों को राघव के जरिये उठवाना चाहती थी, मगर राघव ने ऐसा नहीं किया। इन मुद्दों में एसआईआर के तहत काटी जा रही वोटें, गुजरात में आप के 160 कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ केस दर्ज का मामला, पंजाब में धर्म और जाति के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाने की कोशिश का आरोप, किसानों के लिए एमएसपी गारंटी, पंजाब का केंद्र के पास
बकाया जीएसटी और रुका हुआ रूरल डेवलपमेंट फंड संबंधी मुद्दे प्रमुख हैं।
उसी दिशा में बहो जिधर नदी बहती है : बाजवा
पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने इस मसले पर कहा, आम आदमी पार्टी का असली चेहरा सामने आने लगा है। आम आदमी पार्टी को मजबूती देने वाले लोगों में से राघव चड्ढा एक हैं। आप द्वारा राघव जैसे नेता को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटाने के फैसले से आप के कई नेता मायूस हैं। खैर, राघव अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं, उनका स्वागत है। वैसे भी लोग हमेशा उसी दिशा में जाते हैं, जिस दिशा में नदी का बहाव होता है। और इस वक्त देश का नेतृत्व एक बेहतरीन नेता के हाथ में है।