भाखड़ा बांध की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का खर्च पंजाब सरकार नहीं उठाएगी। सरकार ने सीआईएसएफ के जवानों को वेतन देने में असमर्थता जाहिर करते हुए शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित कर इसकी जानकारी बीबीएमबी प्रशासन को भी दे दी है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह जानकारी दी।
चीमा ने बताया कि सरकार पहले से ही सीआईएसएफ की तैनाती का विरोध कर रही थी। इसके बावजूद केंद्र ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के इनपुट का हवाला देते हुए बीते 28 अक्तूबर को नंगल में एक आधिकारिक कार्यक्रम में भाखड़ा बांध की सुरक्षा पंजाब पुलिस से लेकर सीआईएसएफ को सौंप दी थी। जवानों के सालाना 9 करोड़ रुपये का वेतन पंजाब सरकार को देने की बात कही गई थी। पंजाब सरकार ने कहा कि पंजाब पुलिस भाखड़ा बांध की सुरक्षा के लिए सक्षम थी। केंद्र को बांध की सुरक्षा कड़ी करनी थी तो सरकार से कहते, वहां और पुलिस तैनात कर दी जाती। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी केंद्र के इस फैसले पर नाराजगी जता चुके हैं।
वहीं बीबीएमबी के एक अधिकारी ने कहा कि साल 2021 में पंजाब सरकार ने ही एक पत्र लिखकर भाखड़ा बांध की सुरक्षा सीआईएसएफ को देने का आग्रह किया था। इसका खर्च उठाने की बात भी कही गई थी, लेकिन अब सीआईएसएफ तैनात होने के बाद पंजाब खर्चा उठाने से इनकार कर रहा है, जो उचित नहीं है।
पानी के लिए छिड़ा था हरियाणा-पंजाब में विवाद
भाखड़ा हेड वर्क्स पर पंजाब पुलिस की कथित तैनाती के खिलाफ मई 2025 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। इसमें दावा किया गया कि पंजाब पुलिस हरियाणा को पानी छोड़ने में बाधा डाल रही है। आप सरकार ने भाजपा शासित हरियाणा को और अधिक पानी देने से इन्कार कर दिया है। आप सरकार का कहना था कि हरियाणा ने मार्च तक आवंटित पानी का 103% उपयोग कर चुका है। इस विवाद के चलते पंजाब सरकार ने नंगल बांध, जो भाखड़ा बांध के नीचे स्थित है, की सुरक्षा बढ़ा दी थी। नंगल बांध पर जिस कमरे से पानी की आपूर्ति नियंत्रित की जाती है, उसे बंद कर उसकी चाबी पंजाब पुलिस को दे दी गई थी।