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मालवा के रण से ‘आप’ का फाइनल मास्टर स्ट्रोक: पंथक और किसानी संकट में 'मावां-धीयां' योजना बनेगी ढाल

Thu, 02 Jul 2026 11:11 AM IST
Nivedita सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)

सार

भगवंत मान की सबसे बड़ी ताकत उनका आम जनता से जुड़ाव और उनका हाजिरजवाब अंदाज है। राजनीतिक संकटों के बीच भी सीएम मान ने मंचों से अपनी इस कला का बखूबी इस्तेमाल किया है। गंभीर से गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर भी वे अपने व्यंग्य और अनूठे अंदाज से विरोधियों को निरुत्तर कर देते हैं।
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भगवंत मान - फोटो : X @BhagwantMann
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विस्तार
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पंजाब की सत्ता का रास्ता मालवा के रणक्षेत्र से होकर गुजरता है और मुख्यमंत्री भगवंत मान इस अटल सियासी सच से पूरी तरह वाकिफ हैं। यही कारण है कि चौतरफा राजनीतिक संकटों से घिरी अपनी सरकार को सुरक्षित निकालने और 2027 की चुनावी बिसात बिछाने के लिए उन्होंने 'मालवा' से अपना फाइनल 'मास्टरस्ट्रोक' खेला है। 

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महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये की सीधी वित्तीय मदद देने वाली ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ की शुरुआत कर सीएम मान ने एक तीर से कई सियासी निशाने साधे हैं। 

आम आदमी पार्टी के इस मजबूत किले से शुरू हुई यह योजना महज एक घोषणा नहीं, बल्कि विपक्ष की घेराबंदी को ध्वस्त करने की अचूक सियासी चाल मानी जा रही है। सबसे खास बात यह है कि संकट के इस दौर में सीएम मान इन तमाम चुनौतियों का सामना खुद ही कर रहे हैं और वर्तमान दौर में भी अपनी चिरपरिचित कॉमेडी का तड़का लगाकर विरोधियों पर तीखे राजनीतिक कटाक्ष कर रहे हैं।

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किसान आंदोलनों की धार कुंद करने का 'मूक हथियार'

पंजाब और विशेषकर मालवा बेल्ट में इस समय किसान संगठनों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। बिजली संकट, कर्जमाफी, एमएसपी की कानूनी गारंटी और फसलों के नुकसान जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर किसान सड़कों पर हैं। इस तीखे आक्रोश की काट के लिए मुख्यमंत्री ने सीधे ग्रामीण परिवारों की आधी आबादी यानी महिलाओं के बैंक खातों को टारगेट किया है। सियासी पंडितों का मानना है कि जब सीधे घरों की रसोई और जेब तक नियमित सरकारी मदद पहुंचेगी, तो किसान आंदोलनों की धार जमीनी स्तर पर काफी हद तक कुंद हो जाएगी। इसे सरकार का एक बेहद खामोश लेकिन सबसे मारक 'सियासी हथियार' माना जा रहा है, जो अंदरूनी तौर पर आंदोलन के शोर को शांत करने की क्षमता रखता है।

पंथक संकट का डैमेज कंट्रोल

इस मास्टरस्ट्रोक का सबसे दिलचस्प और रणनीतिक पहलू है 'पंथक राजनीति' के मोर्चे पर डैमेज कंट्रोल। धार्मिक और पंथक सियासत के केंद्र मालवा में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट, 2026’ को लेकर उपजे विवाद के बाद सरकार लगातार बैकफुट पर दिख रही थी। अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को खुले मंच से स्वीकार करने के बाद भी विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

अकाल तख्त साहिब प्रकरण से जो तीखी राजनीतिक तपिश पैदा हुई है, उसे सरकार 'मावां-धीयां सत्कार योजना' की आर्थिक ठंडक से दबाना चाहती है। एक तरफ जहां सरकार धार्मिक और पंथक मोर्चे पर तीखे सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी तरफ हर घर तक सीधी वित्तीय मदद पहुंचाकर मुख्यमंत्री जमीन पर एक मजबूत और सकारात्मक जनमत तैयार कर रहे हैं।
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कॉमेडी भी बड़ा हथियार

भगवंत मान की सबसे बड़ी ताकत उनका आम जनता से जुड़ाव और उनका हाजिरजवाब अंदाज है। राजनीतिक संकटों के बीच भी सीएम मान ने मंचों से अपनी इस कला का बखूबी इस्तेमाल किया है। गंभीर से गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर भी वे अपने व्यंग्य और अनूठे अंदाज से विरोधियों को निरुत्तर कर देते हैं। ग्रामीण अंचल के लोग आज भी उनके इस देसी और बेबाक अंदाज से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, जो विपक्ष के भारी-भरकम और गंभीर आरोपों पर अकेले ही भारी पड़ जाता है।

खुद कमान संभाल विपक्ष के चक्रव्यूह को भेदने की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भगवंत मान ने इस बार अपनी रणनीति बदली है। वे अब सिर्फ प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर रहने के बजाय खुद जनता के बीच जाकर सीधे संवाद कर रहे हैं। मालवा के इस दांव ने शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस दोनों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

बहरहाल, मालवा में फिर से अपना पुराना 'मान' और सियासी वर्चस्व हासिल करने के लिए सीएम मान ने यह बेहद सोची-समझी और अचूक बिसात बिछाई है। अब देखना यह होगा कि 'मावां-धीयां' योजना की यह ढाल और मुख्यमंत्री का यह जनता से सीधा संवाद 2027 के महासमर में विरोधी दलों के तीखे तीरों से सरकार को कितना बचा पाती है।
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