पंजाब का किसान कर्ज के बोझ से निकल ही नहीं पा रहा। किसानों पर कर्ज को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आरबीआई की एक रिपोर्ट मंगलवार को पेश की। यह रिपोर्ट किसानों पर व्यावसायिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के कर्ज को लेकर है।
इसके अनुसार पंजाब के 38.37 लाख किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं। इनके ऊपर विभिन्न बैंकों का करीब 1.04 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। प्रदेश का किसान इस कर्ज को अपनी खराब वित्तीय हालत की वजह से चुका नहीं पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार व्यावसायिक बैंकों का कर्ज चुकाने में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के किसान प्रदेश के किसानों से आगे हैं।
व्यावसायिक बैंकों का पंजाब के 23.28 लाख किसानों पर 85,460 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि हरियाणा के 22.23 लाख किसानों पर 71,886 करोड़, हिमाचल प्रदेश के 4.04 लाख किसानों पर 8,034 और जम्मू एंड कश्मीर 9.29 लाख किसानों पर 16,481 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसी तरह सहकारी व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का भी किसानों पर भारी कर्ज है।
पंजाब के 11.94 लाख किसानों पर सहकारी बैंकों का 10,021 करोड़ रुपये का कर्ज है। हरियाणा के 13.58 लाख किसानों पर 14,354 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसी तरह पंजाब के 3.15 लाख किसानों पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का 8,583 करोड़ रुपये कर्ज खड़ा है, जिसे चुकाने में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा के 4.14 लाख किसान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के 10,615 करोड़ रुपये कर्ज में दबे हुए हैं।
केंद्र से नहीं मिली राहत, अब राज्य सरकार से उम्मीद
केंद्र के साथ ही राज्य सरकार के सामने भी किसानों पर पड़े इस कर्ज के बोझ को कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार ने बजट में किसानों को कर्जा माफी को लेकर कुछ खास राहत नहीं दी। अब किसानों को पंजाब के बजट से ही आस है कि शायद उनके बोझ को राज्य सरकार कुछ कम कर दे।
केंद्र ने किसानों की कर्जा माफी को लेकर मांग पूरी नहीं की है। अब किसानों को सिर्फ राज्य सरकार से ही आस है कि आने वाले प्रदेश के बजट में कर्जा माफी को लेकर किसानों को कुछ राहत दी जाए। सरकारों को यह समझ नहीं आ रही है कि किसानों के लिए कृषि इतनी लाभकारी होती है तो वे पिछले एक साल से इस तरह बॉर्डर पर नहीं बैठे होते। राज्य के आधे से ज्यादा किसानों पर कर्ज खड़ा है जो लगातार बढ़ता जा रहा है।
-सरवण सिंह पंधेर, संयोजक, किसान मजदूर मोर्चा।