श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस पर पंजाब सरकार की ओर से श्री आनंदपुर साहिब में भाई जैता जी की याद में पांच ऐतिहासिक गैलरियां तैयार की गई हैं। यह यादगार गैलरी पांच एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। इन्हीं गैलरियों में से एक गैलरी में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके लिए गुरु तेग बहादुर जी का त्याग भी दर्शाया गया है।
इन यादगार गैलरियों का डिजाइन श्री गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के आर्किटेक्चर विंग द्वारा तैयार किया गया है। यह स्मारक दो भागों में पूरा किया गया है। इस पर कुल 20 करोड़ रुपये की लागत आई है। पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि पंजाब सरकार श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों का आयोजन बड़े पैमाने पर कर रही है। सौंद ने कहा कि भाई जैता जी का जीवन सिख इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिस पर जितना भी गर्व किया जाए, वह कम है।
पांच गैलरियों का विवरण
आशीर्वाद : पहली गैलरी में सिख गुरुओं साहिबान के बारे में जानकारी दी जाएगी और बताया जाएगा कि भाई जैता जी के पूर्वज गुरु साहिबान से प्रारंभ से ही जुड़े हुए थे। यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
जीवन : दूसरी गैलरी में भाई जैता जी के माता-पिता का विवाह, उनका जन्म और उनके कुल की झलक दिखाई जाएगी।
त्याग : तीसरी गैलरी में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार, उनका नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के पास आकर गुहार लगाना, गुरु जी का शहादत के लिए श्री आनंदपुर साहिब से प्रस्थान करना और चांदनी चौक में गुरु जी की शहादत को ऑडियो-विज़ुअल माध्यम से दर्शाया गया है। भाई जैता जी द्वारा गुरु जी का शीश लेकर आने का दृश्य भी दिखाया गया है।
रंघरेटे गुरु के बेटे : चौथी गैलरी में पेंटिंग्स और ऑडियो-वीडियो के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे भाई जैता जी ने गुरु जी का शीश बाल गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को भेंट किया। इसमें ‘रंघरेटे गुरु के बेटे’ की उपाधि, गुरु जी का शीश कीरतपुर साहिब से गुरुद्वारा सीसगंज साहिब तक नगर कीर्तन के रूप में ले जाना, भाई जैता जी को पहले नगाड़ची के रूप में दिखाना व खालसा पंथ का जन्म और भाई जैता जी की विभिन्न लड़ाइयों के दृश्य प्रदर्शित किए जाएगा।
संघर्ष : पांचवीं गैलरी में भाई जैता जी से संबंधित श्री आनंदपुर साहिब स्थित ऐतिहासिक तपस्थल, गुरु साहिब द्वारा अपने परिवार के साथ श्री आनंदपुर साहिब छोड़ने का दृश्य और अंत में भाई जैता जी के जीवन की संपूर्ण झलक एनिमेशन के माध्यम से प्रस्तुत की गई है।
कौन थे भाई जैता जी
बाबा जैता जी का नाम भाई जीवन सिंह भी था। 13 दिसंबर 1661 को पटना में जन्मे भाई जैता जी एक सिख सेनापति और गुरु गोबिंद सिंह के साथी थे। सिख समुदाय उन्हें गुरु तेग बहादुर जी का कटा हुआ सिर दिल्ली से आनंदपुर साहिब लाने के लिए अदब से याद करता है ताकि मुगलों के कब्जे में रहने के बजाय गुरु जी का उसका अंतिम संस्कार किया जा सके। यह काम उन्होंने बहुत ही बहादुरी और बुद्धिमता से किया था।