1994 बैच के भारतीय वन सेवा के धर्मिंदर शर्मा ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक पंजाब के मुखी के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। इसके साथ ही वह पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे।
इस अवसर पर धर्मिंदर शर्मा ने कहा कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, प्रदेश में हरियाली बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। शर्मा ने कहा कि जुलाई 2025 में होने वाला 'वन महोत्सव' एक विशिष्ट कार्यक्रम होगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने का आह्वान किया, क्योंकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण बनाए रखना एक आवश्यकता है।
शर्मा 1994 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) यूपीएससी टॉपर हैं और उनकी शिक्षा और अनुभव के कारण वे वन्यजीव विशेषज्ञ, वनस्पति विज्ञानी और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधक भी हैं।
उन्होंने प्लांट साइंसेज में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और क्रैनफील्ड विश्वविद्यालय यूके से मार्शल पैपवर्थ स्कॉलरशिप पर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा शर्मा ने यूके, फिनलैंड की विश्वविद्यालयों और येल विश्वविद्यालय, यूएसए से वन्यजीव और संबंधित विज्ञान में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उनकी उपलब्धियों में पंजाब की राज्य वन अनुसंधान योजना तैयार करना भी शामिल है, जिसने 1999 में उस समय के जीका (जापान) प्रोजेक्ट के तहत अनुसंधान परियोजनाओं को दिशा प्रदान की।
साल 2000 में फिरोजपुर वन मंडल का "वर्किंग प्लान" (एक उच्च तकनीकी दस्तावेज) तैयार करने के अलावा शर्मा ने फील्ड डायरेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 2006-09 के बीच छतबीड़ चिड़ियाघर का "मास्टर प्लान" भी तैयार किया। यह भारत का इस संदर्भ में पहला दस्तावेज था और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण भारत सरकार द्वारा इसकी सराहना की गई। यह दस्तावेज तब से चिड़ियाघर में चल रहे सभी विकास का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने यूके से एग्रोफॉरेस्ट्री प्रणालियों में कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन में विशेषज्ञता प्राप्त की थी, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई संस्थाओं द्वारा जलवायु परिवर्तन और अन्य पर्यावरण मुद्दों पर बोलने और इसके भागीदारों को प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया गया।