अरुण खेत्रपाल को सैल्यूट करते उनके दोस्त।
- फोटो : अजय वर्मा
वो इक्कीस का था, इक्कीस का ही रहेगा
अरुण खेत्रपाल के पिता बिग्रेडियर एमएल खेत्रपाल सेना में कोर ऑफ इंजीनियर्स के अधिकारी थे। खेत्रपाल जब शहीद हुए तो वे 21 साल के थे। शहादत के बाद खेत्रपाल के पिता ने कहा था, ‘वो इक्कीस का था, इक्कीस का ही रहेगा।’ इसीलिए खेत्रपाल पर बनी इस फिल्म का नाम ‘इक्कीस’ रखा गया है। खेत्रपाल के परदाद सिख सेना में कार्यरत थे और 1848 में उन्होंने चिलियांवाला क्षेत्र में ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। अरुण के दादा पहले विश्व युद्ध के सैनिक थे और 1917 से 1919 तक उन्होंने इसमें हिस्सा लिया था। खेत्रपाल के साथी मेजर जनरल तेजपाल सिंह बख्शी, कर्नल जसपाल सिंह संधू और कर्नल एपीएस संधू कहते हैं कि उन्हें अपने मित्र खेत्रपाल की कुर्बानी पर नाज है और वे उस पर आधारित फिल्म इक्कीस देखने को भी खासे उत्साहित भी हैं।