पंजाब में बड़े पैमाने पर हुए डॉक्टरों के तबादलों में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। इन तबादलों के तहत जिन शहरों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है, वहां उनके पति, पत्नी या परिजनों के निजी अस्पताल पहले से चल रहे हैं।
ऐसे मामले सामने आने के बाद इन तबादलों में सिफारिशों और लेन-देन होने के भी आरोप लगने लगे हैं। मसलन, गुरदासपुर जिले में कुल 56 डॉक्टरों के तबादले हुए। उसके बाद 7 जून को गुरदासपुर में चार और डॉक्टरों के तबादले कर दिए गए।
गुरदासपुर के जिला अस्पताल में ही 8 ऐसे मेडिकल अफसर नियुक्त किए गए हैं, जिनके पति या परिजनों का निजी अस्पताल उसी शहर में हैं।
तबादलों पर फिर होगा विचार
तबादलों में इस गड़बड़झाले के बारे में जब प्रशासन को जानकारी दी गई, तो जवाब ढिलमुल रवैया वाला रहा। स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर अशोक नैय्यर ने कहा कि इन तबादलों पर नए सिरे से विचार किया जाएगा।
मंत्री देंगे जवाब
स्वास्थ्य विभाग की मुख्य संसदीय सचिव नवजोत कौर सिद्धू का कहना है कि इस सिलसिले में मंत्री ही जवाब दे सकते हैं। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की थी और उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में एक पारदर्शी तबादला नीति तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री का कहना है कि ट्रांसपेरेंट ट्रांसफर पॉलिसी बनाई जाए, जिसमें मेरिट के हिसाब से डाक्टरों का तबादला किया जाए और किसी की सिफारिश मंजूर न हो। परंतु इसके उलट एक साथ डाक्टरों की बदलियां बिनी किसी पॉलिसी के कर दी गई। जिसकी जरूरत थी उसे बदला नहीं गया, जिसकी नहीं थी उसका तबादला कर दिया गया।