थानों की तरह सरकारी अस्पताल जाने से डरते हैं लोग
सूबे में पुलिस की छवि लोगों के बीच बहुत अच्छी नहीं है वहीं, आम लोग भी राज्य के सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में इलाज के लिए जाने से भी कतराते हैं। यह मामला सेहत विभाग के आला अफसरों की बैठक में सामने आया है।
विभाग के अफसरों का मानना है कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए स्टाफ के अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, साफ-सफाई की खराब व्यवस्था, दवाओं की कमी आदि के अलावा मरीजों के प्रति मुलाजिमों का रूखा बर्ताव इसके मुख्य कारण हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सेहत विभाग ने अब अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के कामकाज में व्यापक बदलाव करने और स्टाफ को पीपुल फ्रेंडली बनाने का फैसला लिया है।
कोविड संकट के समय राज्य के सरकारी अस्पतालों और उनके स्टाफ ने बेहतरीन भूमिका निभाई है। हालांकि कई स्थानों पर स्टाफ के व्यवहार को लेकर शिकायतें भी मिलीं, लेकिन अब स्टाफ की कमी को दूर करने के तेजी के प्रयास शुरू किए गए हैं। इसके तहत, विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य मुलाजिमों की भर्ती शुरू की गई है। - बलबीर सिंह सिद्धू, सेहत मंत्री, पंजाब
अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए सभी अफसरों को निर्देश जारी किए गए हैं और उनसे इस बाबत सुझाव देने को भी कहा गया है। - गुरिंदरबीर सिंह, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।