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48 घंटे बंद से 15 करोड़ का नुकसान

Tue, 08 Jul 2014 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी गोबिंदगढ़
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लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ में मंगलवार को बिक्रीकर विभाग की धक्केशाही एवं छापामारी के विरोध में समूह औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों ने रोष स्वरूप 48 घंटे के लिए 70 प्रतिशत यूनिट बंद रखे। हालांकि कुछ यूनिटों में आम दिन की तरह काम चलता रहा लेकिन माल की कोई गाड़ी नहीं भरी गई क्योंकि बंद से जहां 1000 के करीब ट्रकों का चक्का जाम रहा वहीं धर्म कांटे भी बंद रहे।
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रोलिंग मिल, फर्नेस इकाई, पाइप प्लांट और समस्त ट्रेडरों व व्यापारी बंद से प्रभावित हुए वहीं उनके साथ काम करते करीब 80 हजार मजदूरों को भी खाली बैठना पड़ा।


आईसरा के अध्यक्ष विनोद वशिष्ट ने बताया कि इस 48 घंटे के बंद पर पंजाब सरकार के रेवेन्यू में भारी कटौती आएगी जिससे सरकार को सीधे-सीधे 15 करोड़ रुपये के नुकसान होने का अंदेशा है वहीं इससे उद्योगपतियों का भी तकरीबन 15-20 करोड़ का नुकसान होगा। इसके विपरीत स्माल स्केल के चेयरमैन हरमेश जैन का कहना है कि यहां पर 80 हजार लेबर है।
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अगर एक परिवार के पीछे 5 सदस्य हैं तो इससे 4 लाख लोगों को रोटी के लाले पड़ रहे हैं। 1000 यूनिटों पर बंद का असर मजदूर से लेकर मालिकों और पंजाब सरकार को पड़ रहा है जिसके लिए सरकार को अपने विभाग अफसरों की मनमानियों पर अंकुश लगाना जरूरी है नहीं तो हालात इससे भी बदतर होने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक्साइज ट्रिब्यूनल, सेंट्रल एक्साइज अपील, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि बिजली खपत के मामले में कोई भी पैरामीटर निर्धारित नहीं किया जा सकता। फिर भी बिक्रीकर विभाग 750 यूनिट प्रति टन की खपत को आधार मानकर फर्नेस उद्योगों के साथ सरेआम धक्केशाही कर रहा है। जहां तक इंडस्ट्री की बात है वह तो पहले ही वेंटिलेटर पर है। सरकार इस पर और दबाव बनाकर इसे खत्म करने की कार्रवाईयों पर भी अंकुश लगाए।



स्टील चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष भारत भूषण टोनी का कहना है कि इस टोकन स्ट्राइक के बाद भी अगर पंजाब सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो उद्योगपति भूख हड़ताल पर जाएंगे। फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष महिंदर गुप्ता ने हड़ताल से सीधा उद्योगपतियों का आर्थिक नुकसान करार देते हुए कहा कि सरकार तो इस घाटे को किसी भी रूप से पूरा कर लेगी लेकिन, हड़ताल किए जाने का यह फैसला गलत भी है।
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