पीपीपी उपाध्यक्ष भगवंत मान ने पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल के कांग्रेस से हाथ मिलाने के खिलाफ बगावत कर दी है। वह आज पीपीपी को अलविदा कह देंगे।
‘अमर उजाला’ से फोन पर हुई बातचीत में भगवंत मान ने कहा कि वह कांग्रेस के साथ नहीं जा सकते, इसलिए पीपीपी को छोड़ रहे हैं।
वह रविवार को पीपीपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को अगली सियासी रणनीति की घोषणा करेंगे।
उनके आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चाएं हैं, लेकिन भगवंत मान ने इसकी पुष्टि नहीं की। उन्होंने कहा कि वह पीपीपी छोड़ने के बाद ही अगली घोषणा करेंगे।
इतना जरूर माना कि पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल के कांग्रेस के साथ चुनावी समझौते के बाद उनकी आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ निरंतर बातचीत हो रही है तथा जल्द ही कोई निर्णय ले लेंगे।
उन्होंने कहा कि वह एक मिशन के तहत पीपीपी में शामिल हुए थे। पहले पीपीपी के लिए कांग्रेस और अकाली-भाजपा दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू थे, लेकिन अब मनप्रीत का रवैया बदल गया है।
केवल एक बठिंडा सीट के लिए उन्होंने पीपीपी के मिशन को दांव पर लगा दिया है। इसमें वह उनका साथ नहीं दे सकते। वह निजाम बदलने की सोच को लेकर पीपीपी में गए थे, लेकिन अब मनप्रीत अपने उद्देश्य से भटक गए हैं।
भगवंत ने कहा कि वह किसी भी हालत में कांग्रेस का सहयोग नहीं कर सकते तथा न ही ले सकते हैं।
ऐसे में उनका पीपीपी से अलग हो जाना ही बेहतर है, क्योंकि यदि वह बठिंडा में मनप्रीत बादल के लिए वोट मांगते हैं तो यह राहुल गांधी के हाथ मजबूत करने वाला कदम ही होगा।