अगर प्रदेश में नौकरी मिले तो पराये देस कोई क्यों जाए, यह कहना है पटियाला यूनिवर्सिटी से एमटेक पास विनोद कुमार और एमफिल पास हरमनजीत कौर का।
वे बठिंडा अदालत में चपरासी के पद के लिए इंटरव्यू देने पहुंचे थे। उन्होंने पंजाब के मौजूदा सिस्टम का हाल बयां करते कहा कि जिनके पास सिफारिश और पैसा है, उनको नौकरी मिल जाती है।
यहां तक कि उनके सर्टिफिकेट भी चेक नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि उनसे ये भी नहीं पूछा जाता कि उन्होंने कौन सी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है।
इसी पद के लिए इंटरव्यू देने पहुंची पटियाला यूनिवर्सिटी से एमए पास कमलप्रीत कौर का कहना है कि सूबे का युवा प्रदेश सरकार की बेरुखी फिर मौजूदा सिस्टम का शिकार हो रहा है।
कमलप्रीत ने कहा कि पंजाब में रोजगार के कम विकल्पों के चलते सूबे के ज्यादातर युवा विदेशों में पढ़ाई और काम को तरजीह दे रहे हैं।
कमलप्रीत का कहना है कि पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की इतनी होड़ है कि वे वैध और अवैध किसी भी तरीके से जाना चाह रहे हैं।
किसी भी प्रदेश की तरक्की के लिए ज्यादातर योगदान युवा वर्ग का होता है, लेकिन उसी वर्ग को अगर अपना भविष्य धुंधला दिखाई देने लगे तो वह अपने इसके लेकर पलायन करना शुरू कर देता है।
एमटेक पास विनोद कुमार ने कहा कि वह चपरासी पद के लिए कई बार कोशिश कर चुका है, लेकिन उसकी योग्यता ज्यादा होने के चलते उसे नौकरी नहीं मिल रही। उसने कहा कि अगर सरकार चाहे तो प्रदेश के हर युवा को उसकी योग्यता के अनुसार नौकरी दे सकती है।
सरकार की बेरुखी से परेशान युवाओं ने कहा कि प्रदेश सरकार को युवा वर्ग को रोजगार मुहैया करवाने के लिए सबसे पहले पहल करनी चाहिए। इससे प्रदेश का युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित न हो। उन्होंने कहा कि जब पढे़ लिखे युवा को नौकरी नहीं मिलती तो वह परेशान होकर किसी न किसी गलत रास्ते पर चल पड़ता है।