फरीदकोट में भ्रूण परीक्षण के बाद गर्भपात करने के मामले में सीजेएम डा. रजनीश की अदालत ने कोटकपूरा शहर की दो महिला डॉक्टरों समेत छह लोगों को ढाई-ढाई साल कैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
जुर्माना अदा न करने पर 6-6 माह और जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने दोषियों को उच्च अदालत में अपील करने के लिए 30 दिन का समय देते हुए जमानत पर रिहा कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग ने गांव पंजगराई खुर्द (मोगा) निवासी महिला की शिकायत पर कोटकपूरा के फौजी रोड स्थित सिंगला नर्सिंग होम की संचालिका डा. स्नेह प्रभा और डा. अलका गुप्ता समेत पीड़िता के पति बलतेज सिंह, सास जसवंत कौर, ननद सिमरजीत कौर व मौसेरी सास महिंदर कौर के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी।
स्वास्थ्य विभाग के वकील अतुल गुप्ता ने बताया कि यह घटना जून 2011 की है। मोगा के थाना समालसर से संबंधित गांव पंजगराई खुर्द की विवाहिता जसप्रीत कौर के गर्भधारण करने पर उसके ससुराल वालों ने उस पर लिंग परीक्षण का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
जसप्रीत कौर के विरोध के बावजूद उसके पति, सास, ननद और मौसेरी सास ने कोटकपूरा के सिंगला नर्सिंग होम के अल्ट्रासाउंड सेंटर से भ्रूण का लिंग परीक्षण करवाया। डाक्टरों द्वारा गर्भ में लड़की बताए जाने पर ससुराल वालों ने जसप्रीत का गर्भ गिरवा दिया।
जसप्रीत ने इस घटना की सूचना सिविल सर्जन फरीदकोट को दी, जिन्होंने विशेष टीम का गठन कर इस मामले की जांच की। भ्रूण परीक्षण और गर्भपात किए जाने की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग ने दोनों महिला डाक्टरों व चारों ससुरालियों के खिलाफ अदालत में मामला दाखिल किया।