सिखों की धार्मिक भावनाएं को ठेस पहुंचाने के आरोप में बुधवार को स्थानीय अदालत ने सिरसा के डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह को समन जारी किया है।
अदालत ने डेरामुखी को 8 अगस्त को निजी तौर पर अदालत के सामने पेश होने का आदेश जारी किया हैं। तकरीबन तीन बजे फैसला सुनाए जाने के समय अदालत परिसर के बाहर भारी संख्या में डेरा प्रेमी व सिख जत्थेबदियों के लोग मौजूद थे। हालांकि अदालत के फैसले के बाद माहौल तनावपूर्ण ना हो इसके लिए जिला प्रशासन ने पहले से ही डीएसपी गुरजीत सिंह रोमाणा के नेतृत्व में भारी गिनती में पुलिस फोर्स को अदालत परिसर के बार तैनात किया गया था।
अदालत के इस फैसले से जहां एक ओर सरकार, पुलिस तथा डेरी प्रेमियों को झटका लगा है वहीं दूसरी ओर अदालत द्वारा सुनाए गए उक्त फैसले का स्वागत करते हुए सिखों ने अदालत परिसर के बाहर मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।
20 मई, 2007 को थाना कोतवाली मे गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान राजिंद्र सिंह सिद्धू की ओर से डेरामुखी गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में डेरामुखी पर आरोप था कि उन्होंने सिखाें के 10वें गुरु गोबिंद सिंह की पोशाक धारण कर प्रेमियों को जामे इंसा पिलाया था। इस इसका कड़ा विरोध जताया था। इसके बाद डेरामुखी के खिलाफ धारा 295 ए,153,34 आईपीसी के तहत सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया था।
इस मामले में बाबा हरदीप सिंह गुरुसर महराज वाले तथा जसपाल सिंह मंजपुर ने भी अदालत के समक्ष अपील दायर की थी कि उन्हें भी उक्त केस में मुदई बनाया जाए। इसके बाद सिद्धू के साथ बाबा हरदीप सिंह महराज तथा जसपाल सिंह मंजपुर भी मुदई बन गए थे।
बुधवार उक्त केस में डेरामुखी की ओर से उनके वकील नवकरण सिंह तथा राजिंद्र सिंह सिद्धू की ओर से उनके वकील जतिंद्र राय खट्टर पेश हुए। उक्त मामले चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रमन कुमार की अदालत ने डेरामुखी को समन जारी करते हुए उन्हें 8 अगस्त को निजी तौर पर पेश होने के आदेश जारी कर दिया।