आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन (सीटू) की ओर से शनिवार को बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रांतीय सचिव गगनदीप कौर ने कहा कि आंगनबाड़ी सेंटरों, वर्करों और हेल्परों की हालत सुधारे बिना इनटेग्रेटिड चाइल्ड डेवलेपमेंट स्कीम (आईसीडीएस) के अधीन शुरूकिए गए 33 प्रोजेक्ट सही मायने में सफल नहीं हो पाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट बच्चों और माताओं में कुपोषण और बच्चों की मौत दर घटाने के उद्देश्य को लेकर शुरू किए गए है।
लेकिन दुखद बात है कि इन प्रोजेक्टों को सफल बनाने के लिए अहम स्थान रखने वाले हेल्परों और वर्करों की हालत को सुधारने के लिए सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।
उन्हें मान भत्ते के रुप में नामात्र राशि दी जाती है। जिससे एक परिवार के एक व्यक्ति का गुजारा करना मुश्किल है। आज तक आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों ने जो भी प्राप्त किया है, वह मात्र अपने संघर्ष के दम पर ही प्राप्त किया है। जबकि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में बेरुखी दिखा रही है।
प्रांतीय सचिव ने कहा कि सभी सियासी दलों के नेता दावे तो बड़े-बड़े करते है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सभी दावे हवा हो जाते है। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर देश की करीब 28 लाख आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर मौजूदा सरकारों के खिलाफ संघर्ष शुरू करेंगी। अंत में उन्होंने आंगनबाड़ी सेंटरों की अपनी इमारतें, कर्मियों को पेंशन, ग्रेचुएटी और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की। इसके अलावा वर्करों और हेल्परों को सरकारी मुलाजिम घोषित करने की मांग की। बैठक में कमलजीत फरीदकोट, भागवंती फाजिल्का, प्रकाश बठिंडा और चरणजीत कौर मोगा मौजूद थे।