पंजाब पुलिस ने सरबत खालसा की ओर से नियुक्त किए जत्थेदारों के अलावा पूर्व आतंकियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
इसी कड़ी के तहत थाना बधनी कलां में 11 साल पुराने जानलेवा हमले के केस के मुख्य आरोपी जगतार सिंह हवारा के बारे में जांच शुरू की है।
साथ ही पूर्व आतंकियों के बारे में भी ब्योरा एकत्र किया जा रहा है। पंजाब पुलिस प्रमुख (डीजीपी) और कानूनी माहिरों से हरी झंडी मिलने के बाद हवारा को तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया जा सकता है।
मालूम हो कि बेअंत सिंह के हत्यारे हवारा को सरबत खालसा ने श्री अकाल तख्त का जत्थेदार घोषित किया था। थाना बधनी कलां के एसएचओ गुरमिंदर सिंह ने कहा कि सीनियर पुलिस अफसरों ने इस केस का रिकॉर्ड और मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा था।
उन्होंने कहा कि केस पुराना होने की वजह से फाइल जिला पुलिस प्रमुख दफ्तर की वीआरके ब्रांच में है। पुलिस कप्तान (आई) हरजीत सिंह पन्नू ने कहा कि इस केस की जांच एसएसपी कर रहे हैं। जिला पुलिस प्रमुख मुखविंदर सिंह भुल्लर छुट्टी पर होने से उनके साथ संपर्क नहीं हो सका।
सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी ने सरबत खालसा की ओर से नियुक्त किए जत्थेदारों के आपराधिक रिकॉर्ड का ब्योरा तलब किया है।
इस कड़ी के अंतर्गत थाना बधनी कलां में कांस्टेबल जसवीर सिंह पर जानलेवा हमला करने के आरोप में 11 साल पहले दर्ज केस की दबी पड़ी जगतार सिंह हवारा की फाइल पर सीनियर पुलिस अफसरों की नजर पड़ी।
उन्होंने इसकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक इस केस में हवारा को मुख्य आरोपी दर्शाया गया था, लेकिन उसकी इसमें गिरफ्तारी नहीं हुई।
उसके दो साथियों को 6 साल पहले 19 जनवरी 2010 को स्थानीय एडिशनल जिला एवं सेशन जज अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
इस बारे में सीनियर पुलिस अफसरों एवं कानूनी माहिरों से राय जानने के बाद जगतार सिंह हवारा को प्रोडक्शन वारंट पर लेने या न लेने के बारे में फैसला होगा।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक घटना वाले दिन बधनी कलां में शादी समारोह में शामिल होने आई एनआरआई जसविंदर कौर की हत्या करने के लिए नॉर्वे से बब्बर खालसा के बड़ आतंकी ने जगतार सिंह हवारा के साथ संपर्क किया था।
पुलिस चौकी लोपो में तैनात कांस्टेबल जसवीर सिंह को ऑल्टो कार में घूमते संदिग्ध नौजवानों ने 16 फरवरी 2005 को उस समय गोली मारी थी, जब अमृतसर से अगवा विद्यार्थी परबीर की खोज के लिए पंजाब में हाई अलर्ट था। थाना बधनी कलां पुलिस ने 18 फरवरी को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस भी दर्ज किया था।
पुलिस ने पहले इस केस में पिता-पुत्र समेत 5 निर्दोष लोगों को ही नामजद कर उन्हें जेल भेज दिया था, लेकिन 5 माह के बाद जुलाई 2005 में चंडीगढ़ में बब्बर खालसा के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद उस समय के तत्कालीन डीजीपी ने खुलासा किया था कि लोपो पुलिस चौकी के कांस्टेबल जसवीर सिंह को जगतार सिंह हवारा ने गोली मारी थी।
इस पर मोगा पुलिस ने जेल में बंद 5 निर्दोष व्यक्तियों को अदालत में से डिस्चार्ज करवा दिया। जगतार सिंह हवारा के दो साथियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर गिरफ्तारी की, लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस ने हवारा से कोई भी पूछताछ नहीं की।
पंजाब में बदले समीकरण और सरबत खालसा की तरफ से हवारा को श्री अकाल तख्त साहिब का कार्यकारी जत्थेदार नियुक्त करने बाद इस केस की जांच शुरू कर दी गई है।
कांस्टेबल जसवीर सिंह ने बताया कि इस घटना में गोली लगने बाद वह उम्र भर के लिए अपाहिज बन गया है। उसका इलाज अब तक चल रहा है।
पंजाब सरकार या विभाग ने उसकी बहादुरी का कोई इनाम नहीं दिया। उसे कांस्टेबल से छोटे हवलदार की तरक्की के सिवाय कुछ नहीं दिया।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन आईजी अब एडीजीपी राजिंदर सिंह ने उन्हें दो लाख की ग्रांट और गैलेंट्री पुरस्कार देने का एलान किया था, लेकिन उसे न तो दो लाख की ग्रांट और न ही पुरस्कार मिला है।