जिला सेशन जज करनैल सिंह आही की अदालत ने दुराचार के मामले की सुनवाई करते हुए सास और जमाई समेत छह आरोपियों को सजा सुनाई है।
इस मामले में दो नाबालिग आरोपियों को किशोर न्यायालय पहले ही सजा सुना चुकी है।
पीड़ित के पिता ने थाना पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई थी कि गांव में ही आठवीं में पढ़ने वाली उसकी 13 वर्षीय बेटी पर उसी के गांव निवासी मंगा सिंह और मलोट निवासी दीपक बुरी नजर रखते थे। इसी कारण उसने अपनी बेटी को उसके मामा मामी के यहां भेज दिया।
मगर दोनों युवक पांच जून 2012 को वहां से भी उसकी बेटी को जबरदस्ती अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर ले गए। इस घटना के बाद पुलिस की ओर से उनकी तलाश की गई। उनकी बेटी के मिलने पर उसने बताया कि दोनों युवकों ने उससे दुराचार किया। युवक छाप्पियांवाली निवासी ही एक अन्य युवक जगरुप सिंह के साथ उसे जगरुप की बठिंडा में रहने वाली सास के पास ले गए थे।
वहां पर भिंदा सिंह उर्फ भिंदर और दीपक भी उसके साथ दुराचार करते रहे। एक सप्ताह बठिंडा में रखने के बाद घुमियारा निवासी हरबंस सिंह उर्फ गोरा और रानी उसकी लड़की को श्री गंगानगर के थाना केसरी सिंह पुरा के गांव रैणा निवासी पम्मा सिंह के पास ले गए।
वहां से उसकी लड़की किसी तरह से उक्त लोगों के चुंगल से आजाद होकर उनके पास पहुंची। इस मामले की सुनवाई करते हुए जिला सेशन जज ने सरकारी वकील रविंदर अबरोल की दलीलों से सहमत होते हुए आरोपी भिंदर सिंह को दस वर्ष कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, जगरुप सिंह, रानी, हरबंस सिंह, पम्मा सिंह और मंगा सिंह को विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दो वर्ष, एक-एक वर्ष व पंद्रह माह की सजा और एक हजार प्रति रुपये जुर्माना किया है। इस मामले में किशोर न्यायालय ने नाबालिग आरोपी दीपक और सोनू को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।