रेल घूस कांड का खुलासा होने के पहले दिन से ही दिन से मैं कह रहा हूं कि इस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है।
सीबीआई ने जिस दिन मुझसे सात घंटे तक पूछताछ की और महेश कुमार की संदीप गोयल व मंजूनाथ से फोन पर हुई बातचीत सुनाई, उस दिन मैं और निश्चिंत हो गया।
बातचीत की रिकार्डिंग सुनते ही स्पष्ट हो गया था कि महेश कुमार जो चाहता था, मैंने उसके बिल्कुल विपरीत किया। ऐसा लग रहा है कि इस पूरे मामले में शायद मैं टारगेट नहीं था। हालांकि कौन टारगेट पर था, इसका खुलासा भी जल्द हो जाएगा।
यह कहना है पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री एवं चंडीगढ़ के सांसद पवन कुमार बंसल का। रेल घूस कांड में घिरे बंसल ने चंडीगढ़ के सेक्टर-28 स्थित आवास पर अमर उजाला से इस मसले पर विस्तार से बातचीत की।
बंसल ने कहा कि जब अचानक मेरे साथ इतनी बड़ी घटना हुई तो मैं अंदर से टूट गया, लेकिन विपक्ष और मीडिया ने मुझे ताकत दी। इसी वजह से आज मैं फिर उठ खड़ा हुआ हूं। अभी मैं यह भी कहने की स्थिति में नहीं हूं कि इस मामले से मेरे भांजे विजय सिंगला का भी लेना देना है या नहीं?
उन्होंने कहा कि मुझे फंसाने में किसी कांग्रेसी का हाथ नहीं हो सकता। भाजपा चाहे इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल और राहुल गांधी का नाम उछाल रही है, लेकिन सभी बातें बेबुनियाद हैं। मेरा मानना है कि बातचीत में अहमद पटेल का नाम सिर्फ प्रभाव डालने के लिए इस्तेमाल किया गया होगा।
महेश कुमार की यह थी गलतफहमी:
बंसल ने कहा कि 19 और 20 अप्रैल को महेश कुमार की मंजूनाथ और संदीप गोयल के साथ हुई बातचीत की ट्रांसस्क्रिप्ट से स्पष्ट है कि संदीप गोयल और मंजूनाथ को यह मालूम ही नहीं था कि मैं 18 अप्रैल को महेश कुमार को मेंबर स्टाफ नियुक्त करने संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर कर चुका हूं।
सीबीआई के पास जो ट्रांसक्रिप्ट है, उससे स्पष्ट है कि महेश कुमार चाहता था कि मेंबर स्टाफ (एमएस), चेयरमैन रेलवे बोर्ड (सीआरबी) और मेंबर इलेक्ट्रिकल (एमएल) की नियुक्ति एक साथ हो।
महेश कुमार चाहता था कि चेयरमैन रेलवे बोर्ड का पद खाली होने के बाद तत्कालीन मेंबर इलेक्ट्रिकल को वरिष्ठता के आधार पर इस पद पर नियुक्त कर दिया जाए।
इसके बाद मेंबर इलेक्ट्रिकल का पद खाली हो जाता और इस पद पर उसे नियुक्त कर दिया जाता। लेकिन, हुआ बिल्कुल इसके विपरीत।
पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि इस मामले में पूरी तरह निर्दोष होते हुए भी मेरे पास खुद को बेगुनाह साबित करने का कोई तरीका नहीं होता, अगर किसी भी वजह से मेंबर स्टाफ की नियुक्ति की फाइल पर दो सप्ताह पहले मैं हस्ताक्षर नहीं कर दिया होता।