पठानकोट में 100 फीट ऊंचे टावर पर तीन दिन से बैठे बैराज औसती संघर्ष कमेटी जैनी-जुगियाल के दो बुजुर्गों के सामने अब खाने-पीने के साथ दैनिक जरूरतें पूरी करने की भी गंभीर परेशानी खड़ी हो गई है।
दोनों को शौच के लिए पन्नी का सहारा लेना पड़ रहा है। 88 वर्षीय शर्म सिंह और 82 वर्षीय कुलविंदर सिंह मांगें पूरी होने तक टावर से नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं। डीसी आवास से करीब एक किलोमीटर दूर गांव सिंघोड़ी में दोनों सरकार और डैम प्रशासन के खिलाफ रोष जता रहे हैं।
प्रशासन ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए दमकल वाहन पुलिस और एंबुलेंस मौके पर तैनात की है। खाने-पीने की सामग्री और जरूरत पड़ने पर दवाइयां रस्सी के सहारे ऊपर पहुंचाई जा रही हैं। एक बुजुर्ग के पास मोबाइल फोन भी है जिससे नीचे मौजूद लोगों से संपर्क किया जा रहा है। हालांकि लगातार तीन दिन से ऊंचाई पर बैठे होने के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।
15 साल से संघर्ष के बाद टावर पर चढ़े
कमेटी प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि प्रभावित परिवार करीब 15 वर्षों से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शाहपुरकंडी बैराज के निर्माण के समय कमेटी से जुड़े 79 सदस्यों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार पात्र प्रभावित परिवारों को डैम में रोजगार मिलना था लेकिन कई पात्र परिवार इससे वंचित रह गए।
कमेटी का आरोप है कि कुछ अपात्र लोगों को नौकरी दी गई। बाद में उन्हें हटाकर दोबारा बहाल भी कर दिया गया। इसे लेकर प्रभावित परिवारों में रोष है। कमेटी के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी मुलाकात कर मांगें रखी गई थीं लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि डीसी भी अब तक मौके पर नहीं पहुंचीं।
सरकार तक भेजेंगे मांग : डीसी
कमेटी ने पात्र परिवारों के मामलों की दोबारा जांच कर रोजगार देने की मांग की है। दयाल सिंह ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई है और ठोस निर्णय होने तक दोनों बुजुर्ग नीचे नहीं उतरेंगे।
डीसी डा. पल्लवी ने कहा कि विभाग कमेटी के साथ तालमेल कर रहा है। दोनों बुजुर्गों से बातचीत जारी है। उनकी मांग सरकार तक भेजकर समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों को जल्द टावर से नीचे लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।