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पंजाब में सिख कौम में खलबली: श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 गायब स्वरूपों का मामला बना गंभीर, राजनीति भी गरमाई

Fri, 02 Jan 2026 11:04 AM IST
निवेदिता वर्मा पंकज शर्मा, संवाद, अमृतसर (पंजाब)

सार

पूर्व सीए सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने और तूल पकड़ लिया। पंथक हलकों में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर स्वरूपों के गायब होने की जिम्मेदारी किसकी है और यह मामला वर्षों तक दबा क्यों रहा।
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सतिंदर कोहली - फोटो : फाइल
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विस्तार
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अधीन गायब हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों का मामला अब और अधिक संवेदनशील और गंभीर हो गया है। 

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यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सिख कौम की आस्था, जिम्मेदारी और पारदर्शिता से जुड़ा सवाल बन चुका है। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सिख जत्थेबंदियों में खेमाबंदी शुरू हो गई है, जिससे पंथक एकता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

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दिसंबर में इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद और तेज हो गया। पंजाब पुलिस इसे गंभीर आपराधिक मामला मानकर जांच आगे बढ़ा रही है, जबकि एसजीपीसी इसे आंतरिक मामला बताते हुए एफआईआर का विरोध कर रही है। एसजीपीसी का दावा है कि आरोपियों को धार्मिक स्तर पर पहले ही सजा दी जा चुकी है और सरकार जानबूझकर इसमें हस्तक्षेप कर रही है।

पूर्व सीए सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने और तूल पकड़ लिया। पंथक हलकों में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर स्वरूपों के गायब होने की जिम्मेदारी किसकी है और यह मामला वर्षों तक दबा क्यों रहा।
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सिख संगठनों और पंथक नेताओं ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के भाई मंजीत सिंह भोमा, हरियाणा एसजीपीसी के जगदीश सिंह झींडा, सरबत खालसा के जरनैल सिंह सखीरा और संयुक्त अकाली दल के मोहकम सिंह सहित कई नेताओं ने कहा कि 328 स्वरूप केवल एसजीपीसी की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरी कौम की अमानत हैं। उन्होंने निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच की मांग की।

कानून अपना काम कर रहा: संधवां

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने नए साल के मौके पर श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेका और कहा 328 स्वरूपों के मामले में कानून अपना काम कर रहा है। संगत की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। गुरु साहिब की बेअदबी बर्दाश्त नहीं होगी और आरोपितों को सख्त सजा दी जाएगी। कुल मिलाकर यह मामला केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि सिख कौम की आस्था, पंथक मर्यादा और जिम्मेदारी की कसौटी बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और संगत को संतोषजनक जवाब मिलता है या नहीं।

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