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सिख संगठनों ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर एसजीपीसी पर लगाए आरोप

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अमृतसर। एसजीपीसी टास्क फोर्स और सिख संगठनों के बीच हुए 24 अक्तूबर को हुए टकराव के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस थाना ई डिवीजन में एक-दूसरे पर मामले दर्ज करवाए थे। सिख संगठनों के सात बड़े नेताओं ने वीरवार को पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह से मिलकर उन्हें एक शिकायत पत्र सौंपा।
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पत्र में सिख संगठनों ने लिखा है कि एसजीपीसी ने थाना ई डिवीजन में 26 अक्तूबर को सिख संगठनों के सदस्यों पर एफआईआर नंबर 177 दर्ज करवाई। इस पूरे मामले की जांच एक आईपीएस अधिकारी से करवाई जाए और उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर रद्द की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सिख संगठनों पर एक साजिश के तहत हमला किया गया। एसजीपीसी की टास्क फोर्स ने संगठनों के कई सदस्यों को तेजा सिंह समुंद्री हॉल में चार घंटे तक बंधक बनाकर शारीरिक यातनाएं दीं। सिख संगठनों के सदस्यों को गंभीर चोट आईं हैं। जांच अधिकारी एसजीपीसी से 24 अक्तूबर की सीसीटीवी फुटेज लेकर अधिकारियों और टास्क फोर्स कर्मियों की लोकेशन की जांच करवाएं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एसजीपीसी और पुलिस अधिकारियों के बीच मिलीभगत है। पुलिस ने अभी तक 24 अक्तूबर की फुटेज व वीडियो रिकॉर्डिंग को अपने कब्जे में नहीं लिया है। एसजीपीसी के जिस कर्मचारी को चोट लगने का प्रचार किया जा रहा है, उसे एसजीपीसी द्वारा संचालित अस्पताल में ही दाखिल करवाया गया, ताकि उनके विरुद्ध मनमर्जी की धाराएं लगाई जा सकें। टकराव के समय मौके पर मौजूद एसपी हरपाल सिंह और चौकी इंचार्ज गलियारा ने एसजीपीसी की टास्क फोर्स का ही साथ दिया था। एसजीपीसी परिसर में हुल्लड़बाजी किसके द्वारा की गई, इसकी सच्चाई सीसीटीवी फुटेज से मिल जाएगी। शिकायत दर्ज करवाने वालों में बलबीर सिंह मुछल, सुखजीत सिंह खोसा, दिलबाग सिंह, तरलोचन सिंह, लखबीर सिंह महाजन, मंजीत सिंघण झब्बाल और मनजिंदर कौर शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने सिख संगठनों ने सदस्यों को विश्वास दिलाया है कि इस मामले की किसी अधिकारी से जांच करवाई जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
एसजीपीसी कर्मियों पर पर्चा दर्ज करना गलत : लौंगोवाल
वहीं 27 अक्तूबर को सिख संगठनों ने एसजीपीसी अधिकारियों और कर्मचारियों पर केस दर्ज करवाया था। एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने पुलिस द्वारा एसजीपीसी अधिकारियों और कर्मचारियों पर दर्ज किए मामले का विरोध किया है। पंजाब सरकार एसजीपीसी के अस्तित्व को चुनौती दे रही है। पंजाब पुलिस द्वारा एसजीपीसी कर्मचारियों के विरुद्ध मामला दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने कई बार सचखंड की मर्यादाओं को खंडित करने की साजिश रची। एसजीपीसी के मुख्य गेट पर ताला लगा कर एसजीपीसी कर्मचारियों को बंधक बनाने की साजिश रची गई। इस बाबत एसजीपीसी के सचिव महिंद्र सिंह ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता को भी पत्र लिखा है।
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