अमृतसर हेरिटेज स्ट्रीट में झाड़ू की सेवा करने के बाद अमृतसर के श्री अकाल तख्त पर अरदास करते एसजीप
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल, पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी के सदस्यों ने शुक्रवार को गुरुद्वारा सारागढ़ी साहिब से लेकर सचखंड के मुख्य प्रवेश द्वार तक की झाड़ू लगाने की तीन दिन की सेवा पूरी की।
सेवा पूरी करने के अंतिम दिन सतनाम वाहेगुरु का जाप भी किया गया। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के आदेश के अनुसार धार्मिक सजा पूरी करने के बाद सभी सदस्य श्री अकाल तख्त पहुंचे, जहां लौंगोवाल ने अरदास की।
मीडिया से बातचीत के दौरान लौंगोवाल ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश स्वीकार करना हरेक सिख का फर्ज है। एसजीपीसी की वर्तमान कार्यकारिणी को श्री अकाल तख्त से जो भी आदेश मिला, उस पर अमल किया गया है। मई 2016 में गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में हुए अग्निकांड से जले पावन स्वरूप कोई बेअदबी का मामला नहीं था। लापता पावन स्वरूपों का मामला भी बेअदबी का नहीं है। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार एसजीपीसी के कुछ कर्मचारियों के निजी स्वार्थ व लालच वश संगत व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों को दिए गए स्वरूपों की भेंटा एसजीपीसी खातों में जमा नहीं करवाई। इन कर्मचारियों ने रिकॉर्ड में हेराफेरी की है। एसजीपीसी की कार्यकारिणी और अन्य पंथक संगठनों के साथ किए विचार-विमर्श के बाद ही एसजीपीसी ने इस मामले के आरोपियों के विरुद्ध खुद कार्रवाई करने का फैसला किया है। इन सभी कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त कर दिया गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि धरने पर बैठे सिख संगठनों को अपना प्रदर्शन अब वापस ले लेना चाहिए। इससे पहले श्री अकाल तख्त साहिब में रखे श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। संगत ने गुरुबाणी कीर्तन श्रवण किया और अरदास भाई प्रेम सिंह ने की। श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह ने पावन हुकमनामा श्रवण करवाया।