शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी ने एसजीपीसी अध्यक्ष वकील हरजिंदर सिंह धामी की ओर से 17 फरवरी को दिए गए त्यागपत्र पर कोई फैसला न लेते हुए धामी को अपने निर्णय पर पुर्नविचार करने की अपील की है।
इसके लिए एसजीपीसी कार्यकारिणी ने पांच सदस्यों की एक कमेटी गठित की है, यह एक-दो दिन में धामी से होशियारपुर में उनके निवास पर पहुंचकर उन्हें त्यागपत्र पर पुर्नविचार करने की अपील कर अपना पद दोबारा ग्रहण करने की अपील करेगा। इस कमेटी में जूनियर उपप्रधान बलदेव सिंह कल्याण बीबी हरजिंदर कौर, हरप्रीत सिंह, सुरजीत सिंह, सुखहरप्रीत सिंह रोडे को शामिल किया गया है। इसकी अगुवाई एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह करेंगे।
एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह ने बताया कि अगर धामी अपना त्यागपत्र वापस लेते हुए एसजीपीसी की कमान फिर से संभालने प्रति असमर्थता जताएंगे तो अगले एक सप्ताह में फिर से कार्यकारिणी बैठक बुलाकर किसी अन्य एसजीपीसी पदाधिकारी अधिकारी या किसी कार्यकारिणी कमेटी सदस्य को एसजीपीसी का कार्यवाहक अध्यक्ष प्रधान लगाने पर विचार विमर्श होगा। क्योंकि एसजीपीसी के कामकाज को बिना रुकावट के जारी रखने के लिए कई अहम फैसलों को लागू करने के लिए अध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। इसलिए एसजीपीसी के अध्यक्ष पद को अधिक समय तक खाली नहीं रखा जा सकता।
एसजीपीसी के पास है जत्थेदार हटाने का अधिकार
एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह और वरिष्ठ उपाध्यक्ष रधुजीत सिंह विर्क ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से एसजीपीसी का प्रतिनिधि मंडल मुलाकात कर उन्हें एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले तख्त साहिबों के सिंह साहिबान को हटाने एवं जांच करने के अधिकार संबंधी अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 का हवाला देते हुए कहा है कि एक्ट के तहत एसजीपीसी कार्यकारिणी को सिंह साहिबान को हटाने अथवा उनके खिलाफ किसी भी तरह की जांच करने का अधिकार प्राप्त है। इन्हीं अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को जत्थेदारी से हटाया गया है। उन्होंने ज्ञानी हरप्रीत सिंह के खिलाफ जांच रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि एसजीपीसी के पास ज्ञानी हरप्रीत सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत हासिल हैं । ज्ञानी हरप्रीत सिंह के जिस रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया है। उन्होंने उस महिला के साथ ज्ञानी हरप्रीत सिंह की नजदीकियां होने की तस्वीरें भी एसजीपीसी को प्रदान की हैं।
जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने की थी एसजीपीसी की निंदा
उन्होंने कहा कि मर्यादा के तहत इन तस्वीरों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। लेकिन यह तस्वीरें व अन्य साबूत एसजीपीसी के पास मौजूद हैं। ज्ञानी हरप्रीत सिंह इस महिला को विदेशी दौरे पर भी ले जाते रहे हैं। इस संबंधी सबूत भी एसजीपीसी के पास सुरक्षित हैं। इन सबूतों के आधार पर ही अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह को 10 फरवरी को तख्त दमदमा साहिब की जत्थेदारी के पद से हटा दिया गया था। ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाने का फैसला केवल हरजिंदर सिंह धामी का नहीं बल्कि पूरी कार्यकारिणी का सामूहिक फैसला था, क्योंकि धामी उस वक्त एसजीपीसी कार्यकारिणी के सेनापति थे। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी के इस फैसले की निंदा की थी इसलिए धामी ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। विर्क ने दावा किया कि अपने पद पर रहते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गुरु की गोलक में भी अमानत में ख्यानत करते हुए गलत फायदा उठाया था। एसजीपीसी के खर्च पर ही उक्त महिला को विदेश यात्राओं पर ले कर ज्ञानी हरप्रीत सिंह गए थे।