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Punjab: पुलिस की ओर से मारे गए युवकों की याद में SGPC बनाए शहीदी पत्तन, श्री अकाल तख्त के जत्थेदार का आदेश

Wed, 15 Jul 2026 12:52 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, खडूर साहिब

सार

पंजाब में आतंकवाद के दौरान पुलिस ने बेगुनाह नौजवानों को फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मार डाला व उनकी लाशों को लावारिस घोषित करते अलग-अलग श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार कर दिया था।
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हरिके पत्तन में अरदास के दाैरान मौजूद सैकड़ों लोग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन के लीडर जसवंत सिंह खालड़ा समेत पुलिस के हाथों मारे गए अन्य नौजवानों की याद में हरिके पत्तन में शहीदी पत्तन के नाम पर स्मारक बनाया जाएगा। 
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने मंगलवार को हरिके पत्तन में अरदास की। साथ ही शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को आदेश दिया कि सभी बेकसूरों की याद में हरिके पत्तन में शहीदी पत्तन के नाम पर स्मारक बनाया जाए।

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हरिके पत्तन पूरी दुनिया में वेटलैंड के चलते मशहूर है, लेकिन इस बार यह फिल्म सतलुज की रिलीज पर बैन लगाने के बाद पैदा हुए हालात की वजह से चर्चा में है। 

गौरतलब है कि पंजाब में आतंकवाद के दौरान पुलिस ने बेगुनाह नौजवानों को फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मार डाला व उनकी लाशों को लावारिस घोषित करते अलग-अलग श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार कर दिया था। पुलिस की इस बर्बरता का कड़ा विरोध करते हुए ह्यूमन राइट्स संगठन के लीडर जसवंत सिंह खालडा ने यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया था। इसके बाद जसवंत सिंह को अमृतसर के कबीर पार्क से पुलिस ने कथित तौर पर अगवा कर लिया था। 

उस समय तरनतारन के एसएसपी अजीत सिंह संधू के साथ तैनात स्पेशल पुलिस अफसर (एसपीओ) कुलदीप सिंह बचड़े ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सरकारी गवाह के तौर पर गवाही दी थी। जिसके बाद अलग-अलग आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। इससे पहले अजीत सिंह संधू ने ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान दे दी थी। 
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सतलुज फिल्म में सब कुछ दिखाए जाने के बाद, पंजाब में ह्यूमन राइट्स संगठन के नेता जसवंत सिंह व की याद में हरिके पत्तन में अरदास समागम रखा गया।

सीबीआई कोर्ट में यह साबित हो गया था कि तरनतारन पुलिस ने जसवंत सिंह को टॉर्चर करके मारने के बाद उसकी बॉडी हरिके पत्तन दरिया में फेंक दी थी। इस दरिया में अन्य नौजवानों की बॉडी बहा दी गई थीं। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने हरिके पत्तन पहुंचकर अरदास की। 
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