कनाडा अपने वीजा कानूनों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके अनुसार वीजा खत्म होने के बाद करीब सात लाख लोगों को कनाडा छोड़ना पड़ सकता है।
पंजाबी युवा इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर होगा जिनका अस्थायी वीजा या वर्क वीजा खत्म होने जा रहा है। कनाडा की संसद में एक ऐसा बिल पेश किया गया है जिसमें वहां की इमिग्रेशन अथॉरिटी को अतिरिक्त अधिकार देने का प्रस्ताव है। बिल पास होने के बाद एजेंसियों को अस्थायी वीजा धारकों को सख्ती से देश से बाहर निकालने के अधिकार मिल जाएंगे।
सबसे ज्यादा चिंता भारतीय छात्रों और प्रवासियों के बीच देखी जा रही है क्योंकि संसद में पेश हुआ यह नया विधेयक उन्हें कनाडा से बाहर निकाले जाने का खतरा पैदा कर सकता है। कनाडा मामलों के माहिर, प्रसिद्ध लेखक व रेडियो संचालक जोगिंदर बासी का कहना है कि कनाडा की संसद में अगर यह बिल पास होता है तो इसका असर पंजाब मूल के छात्रों पर सबसे अधिक होगा।
कुछ हफ्तों में होगा मतदान
यह बिल संसद की चर्चा में है और अगले कुछ हफ्तों में इस पर मतदान की संभावना है। इस प्रस्ताव के तहत अधिकारियों को यह शक्ति मिल जाएगी कि वह किसी भी अस्थायी वीजा को किसी भी समय रद्द कर सकें या जारी होने से पहले ही रोक सकें। कोई भी भारतीय प्रवासी जो वर्क परमिट, स्टडी वीजा या टूरिस्ट वीजा पर वहां रह रहा है उसे अचानक देश छोड़ने का आदेश मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय छात्रों के करीब 74 प्रतिशत वीजा आवेदन पहले ही रद्द किए जा चुके हैं।
भारत-कनाडा में रिश्ते कमजोर होने के कारण सख्ती
कनाडा के ओटावा के रहने वाले जसविंदर सिंह का कहना है कि भारत और कनाडा के रिश्ते पिछले कुछ साल से काफी कमजोर हुए हैं। त्रूदो सरकार के बयान और कुछ विवादित घटनाओं ने इस दूरी को और बढ़ा दिया है। अब जब यह वीजा बिल पेश किया गया है तो इसे भी उसी तनाव का विस्तार माना जा रहा है। साल 2023 में जहां मात्र 500 आवेदन आए थे। 2024 के मध्य तक यह संख्या 2000 के पार पहुंच गई। प्रशासनिक स्तर पर बढ़ते बोझ को देखते हुए अब सरकार नियमों को सख्त करने की दिशा में बढ़ रही है।
कनाडा के भीतर भी विरोध
कनाडा के भीतर भी विरोध तेज हो गया है। अगर इस कानून को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार को सामूहिक रूप से वीजा रद्द करने और प्रवासियों को एक साथ निकालने की खुली छूट मिल जाएगी। आने वाले महीनों में हजारों भारतीय छात्रों और वर्क वीजा धारकों को देश छोड़ना पड़ सकता है। वहीं, प्रवासियों से जुड़े संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह किसी भी कानून को लाने से पहले उसकी मानवीय और आर्थिक असर पर विचार करे। कनाडा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विदेशी कामगारों पर निर्भर है। ऐसे में इसका असर खुद कनाडा पर भी पड़ेगा।