इकबाल सिंह संधू ने कहा कि उन्होंने करीब 30 वर्ष तक अकाली दल की सेवा की, लेकिन नेतृत्व की नीतियों और पंथक मूल्यों से दूरी के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व महासचिव इकबाल सिंह संधू ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी छोड़कर 'वारिस पंजाब दे' संगठन का दामन थाम लिया। इस मौके पर संगठन के प्रमुख नेताओं मनप्रीत सिंह इयाली और बापू तरसेम सिंह ने उनका स्वागत किया और इसे पंजाब तथा पंथ के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में 'वारिस पंजाब दे' ही ऐसा मंच है, जिस पर पंजाब के लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। उनका आरोप था कि शिरोमणि अकाली दल का वर्तमान नेतृत्व अपने मूल सिद्धांतों और पंथक मुद्दों से भटक गया है, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में निराशा फैली है।
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इकबाल सिंह संधू ने कहा कि उन्होंने करीब 30 वर्ष तक अकाली दल की सेवा की, लेकिन नेतृत्व की नीतियों और पंथक मूल्यों से दूरी के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पद या व्यक्तिगत लाभ की प्राप्ति नहीं, बल्कि पंजाब और पंथ की सेवा करना है।
संधू ने दावा किया कि आने वाले समय में कई अन्य प्रमुख नेता और पंथक विचारधारा से जुड़े लोग भी 'वारिस पंजाब दे' संगठन से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन पंजाब के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा और आगामी चुनावों में जनता की आवाज बनने का प्रयास करेगा।