पाक की जेल में मारपीट से शहीद हुए सरबजीत सिंह की 36 चीजें भारत पहुंच गईं। भारतीय दूतावास के उच्चाधिकारियों ने अटारी बार्डर पर उनकी बहन दलबीर कौर और पत्नी सुखप्रीत कौर को यह सामान सौंपा। सामान हाथ में आते ही सरबजीत की पत्नी फूट-फूट कर रोईं।
लौटाए गए सामान में पवित्र कुरान, दो तौलिए, दो सूट, एक टीशर्ट, दो दरियां, एक बैग, दो सफेद चादरें, प्लास्टिक की पांच प्लेटें, चार पानी की बोतलें, प्लास्टिक का जग और कड़ाही शामिल है।
बहन दलबीर ने बताया कि अगर सरकार प्रयास करती तो उनका भाई जीवित होता। उन्होंने बताया कि पैकेट खोलने की जगह पर सरबजीत की याद में म्यूजियम बनाया जाएगा।
वहां सर्बजीत की प्रतिमा लगाई जाएगी। वह ऐसी व्यवस्था चाहती हैं कि जो भी टूरिस्ट पंजाब में आए वह सरबजीत सिंह की यादगार देखने भिखीविंड जरूर आए।
इस दौरान दलबीर ने कहा कि अगर पाकिस्तान के कुछ मानवाधिकार संगठन सही भूमिका निभाते तो उनके भाई पर न हमला होता। कुछ मानवाधिकार संगठनों के कार्यकर्ताओं की गल्तियों के कारण ही उनके भाई जेल से छूट नहीं पाए और हत्या कर दी गई।
इस दौरान सरबजीत की बेटियां पूनम, स्वप्नदीप तथा सरपंच समेत गांव के लोग भारी संख्या में पहुुंचे थे। इस दौरान अमृतसर के डीसी रवि भगत, तहसीलदार और एससी आयोग के उप चेयरमैन राज कुमार आदि पहुंचे थे।