बीते दिसंबर महीने में ब्यास स्थित एक निजी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक विद्यार्थी द्वारा इसी स्कूल की दूसरी कक्षा की छात्रा के साथ किए दुष्कर्म की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में हो गई है। पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी नाबालिग पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी शामिल कर ली है। पुलिस ने स्कूल के डायरेक्टर, प्रिंसिपल व क्लास टीचर नाम एफआईआर में शामिल कर लिए हैं।
टकसाली अकाली नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि दु:ख का विषय है की तीनों के नाम 21 दिसंबर को एफआईआर में शामिल किए गए थे। लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पूरे मामले के सबूतों को खुर्द-बुर्द करने के आरोप बाबा बकाला के डीएसपी हरिकृष्ण पर लगाते हुए सिरसा ने कहा कि उनको भी मामले की एफआईआर में शामिल किया जाना चाहिए। डीएसपी की भूमिका पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने की नहीं, बल्कि दुष्कर्म आरोपी व उसे परिवार को बचाने की रही है। एफआईआर में शामिल आरोपी खुले आम घूम रहे हैं, पुलिस उनको अरेस्ट नहीं कर रही है। इससे से स्पष्ट कि पुलिस केस को दबाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगया कि इस दुष्कर्म की एफआईआर पुलिस के ऑनलाइन पोर्टल पर थी, 21 दिसंबर के बाद एफआईआर को वहां से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्लास टीचर व प्रिंसिपल ने पीड़ित बच्ची के मां-बाप से कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए, जिसमें लिखवाया गया कि वह कोई भी पुलिस करवाई के पक्ष में नहीं है। क्लास टीचर व प्रिंसिपल ने दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के कपड़े बदलाये, ताकि सबूतों को नष्ट किया जा सके।
सिरसा ने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि बुधवार को सुबह उन्हें फोन आया है,जिसमें उन्हें कहा गया की इस केस में डीएसपी का नाम न उछाला जाए, उन्हें नहीं पता की डीएसपी के हाथ कितने लंबे है। उन्होंने मांग की पंजाब सरकार इस स्कूल का प्रबंध अपने हाथ में ले, ताकि स्कूल में पढ़ने वाले चार हजार बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। यदि सरकार ने एफआईआर में शामिल लोगों को अरेस्ट न किया तो एक बार फिर अभिभावकों के साथ संघर्ष शुरू किया जाएगा। अभिभावकों ने सिरसा को दुष्कर्म पीड़ित संघर्ष कमेटी का सदस्य नियुक्त किया हुआ है।
याद रहे की इस घटना के बाद अभिभावकों ने चार दिन तक अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय मार्ग पर जाम लगाया था। आईजी बॉर्डर रेंज पीएस परमार ने मामले की जांच के दिए आश्वासन के बाद धरना उठाया गया था। जांच के लिए बाल कल्याण आयोग भी जांच करने के लिए स्कूल पहुंचे थे।