बच्चा रोने लगा तो राहुल ने गले लगाया
बाढ़ के कारण सबसे अधिक नुकसान झेल रहे गांव घोनेवाल में जब राहुल पहुंचे तो वहां पर मौजूद लोगों के साथ बात करने लगे। इसी दौरान एक छोटा बच्चा भी परेशानियां बताने लगा और अचानक वह रोने लगा। इसपर राहुल ने उसे गोद में उठाकर गले लगाकर उसे चुप किया। इसी दौरान राहुल लोगों के टूटे घर देखकर भावुक हो गए। गांव घोेनेवाल के ग्रामीणों से मिलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर लिखा-उजड़े आशियाने, बर्बाद खेत, बिखरी जिंदगियां। दर्द आंखों में साफ दिखता है, मगर हौसला अटूट है। राज्य और केंद्र सरकार हर हाल में यह सुनिश्चित करे कि राहत पैकेज और मुआवजा बिना देरी पीड़ितों तक पहुंचाया जाए।
रावी दरिया से तबाह हुए पीड़ितों से मिले राहुल
गांव घनिया के बेट के पूर्व सरपंच सरबजीत सिंह घनिया ने राहुल को बताया कि रावी दरिया और पाकिस्तान क्षेत्र में बहने वाले बसंतर नाले की मार से लोग लगातार पीड़ित रहते हैं। कभी दरिया का पानी, कभी युद्ध और कभी आतंकी वारदातें। सरबजीत सिंह ने कहा कि बाढ़ के चलते उनकी फसलें तो नष्ट हुईं ही, साथ-साथ कई पशु भी मर गए। किसानों ने राहुल को अपनी बर्बादी के वीडियो दिखाए तो राहुल भी भावुक हो गए। उन्होंने सुखजिंदर सिंह रंधावा से इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करवाने को कहा ताकि किसानों की आवाज संसद तक पहुंचाई जा सके। घनिया बेट पूर्व सरपंच गुरमुख सिंह ने बताया कि गांव की 700 एकड़ की जमीन में से केवल 20-25 एकड़ ही बची है। बाकी पर रेत बिछ गई है जिससे फसल बीजना नामुमकिन हो गया है। ही बची है, बाकी की ज़मीन पर बाढ़ का पानी और रेत ने खेती को लगभग नामुमकिन बना दिया है।
रेत उठाने का समय बढ़ाने की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि खेतों से रेत उठाने के लिए जो समय सीमा तय की है, वह नाकाफी है। खेतों का पानी अभी सूखने का नाम नहीं ले रहा, इसलिए रेत उठाने का समय बढ़ाया जाए ताकि किसान अपने खेतों को दोबारा खेती योग्य बना सकें। उन्होंने किसानों द्वारा औजारों व खेती-किसानी के लिए उठाए गए कर्ज़ को भी माफ करने की मांग की।