लाहौर में 34वां विश्व पंजाबी सम्मेलन शुरू, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने रखी बात
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। लाहौर में तीन दिवसीय 34वां विश्व पंजाबी सम्मेलन पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत का झंडा बुलंद करने के आह्वान के साथ रविवार को शुरू हो गया। सम्मेलन के मुख्य आयोजक एवं पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फखर जमान ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि पंजाबी भाषा को विदेशियों से ज्यादा अपने ही लोगों से खतरा है। इसलिए इस तरह की पहल पंजाबियों की चेतना जागृत करने में सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने कहा कि 40 वर्षों के हमारे प्रयासों के कारण विश्व में रहने वाले पंजाबियों को एक मंच पर लाने में सफल हुए हैं।
लाहौर में शुरू हुए सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत से 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा है। इसके अलावा विभिन्न देशों से भी कुछ प्रतिनिधि पहुंचे। विश्व पंजाबी सम्मेलन के भारतीय चैप्टर के चेयरमैन डॉ. दीपक मनमोहन सिंह ने लाहौर शहर की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस शहर ने पंजाबी बोली, संस्कृति और भाषा को संजोकर रखा है। उन्होंने दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि इस शहर ने पंजाबी बोली, संस्कृति और भाषा को संजोकर रखा है। इसके बाद पूरे प्रतिनिधिमंडल ने एक मिनट का मौन रखा।
प्रसिद्ध कवि और पंजाबी विरासत लोक अकादमी के अध्यक्ष गुरभजन सिंह गिल ने विश्व पंजाबी सम्मेलन की सफलता में योगदान देने वाली हस्तियों को याद किया। इनमें सतिंदर नूर, हरविंदर सिंह हंसपाल, अजमेर औलख, प्रिंसिपल सरवन सिंह, वरयाम शामिल हैं। इस मौके पर रिहाना रजब, दर्शन सिंह बुट्टर, डॉ. सुखदेव सिरसा, काहन सिंह पन्नू, गुरप्रीत सिंह तूर, जंग बहादुर गोयल, अमृत कौर गिल, डॉ. शिंदरपाल सिंह, अनीता शब्दीश, बलकार सिंह थे।