-सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी पर लग सकेगी रोक
-मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने दिखाई विशेष वाहनों को हरी झंडी
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तरनतारन। सीमा पार से नशे की तस्करी रोकने के लिए एक ऐतिहासिक पहल के तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज बाज आंख नामक एंटी-ड्रोन प्रणाली (एडीएस) को हरी झंडी दिखाई। इससे पंजाब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस प्रणाली को तैनात करने वाला देश का पहला राज्य बन गया।
आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि इस पहल से नशे के खिलाफ मुहिम में एक और शानदार अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की नशा तस्करों से मिलीभगत के कारण यह अभिशाप राज्य में फैल गया था। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप सरकार ने नशे के खिलाफ बड़ी जंग छेड़ी है और इस कारोबार में शामिल बड़े अपराधियों को सलाखों के पीछे डाला गया है।
उन्होंने कहा कि सीमा पार से पंजाब में नशे की सप्लाई की जा रही है और उन्हें रोकने के लिए यह एंटी-ड्रोन प्रणाली शुरू की गई है। पंजाब को इस लानत से मुक्त करने के लिए तीन एंटी-ड्रोन प्रणालियां शुरू की गई हैं और छह और जल्द शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू किया है। नशा तस्करों की संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है। पंजाब सरकार ने नशे के कुख्यात सौदागरों को सलाखों के पीछे डाल दिया है। ये तस्कर जो समाज को जहर देकर खुद ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं, हमारे असली दुश्मन हैं और राज्य सरकार उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि युद्ध नशे के विरुद्ध मुहिम के तहत पंजाब ने आज सीमा पार से नशे की तस्करी रोकने के लिए आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। पाकिस्तान से पंजाब की 553 किलोमीटर सीमा लगती है जिसे नशा और हथियारों की तस्करी के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और ड्रोन-आधारित तस्करी से पैदा हुई चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नौ एंटी-ड्रोन यूनिट स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन यूनिटों पर 51.4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही हमारे देश की सशस्त्र सेनाएं और बीएसएफ पहले से ऐसी प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं, लेकिन पंजाब देश का पहला राज्य है जिसने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन प्रणाली तैनात की है। यह प्रणाली सीमा पार से नशा सप्लाई करने वाले तस्करों को कड़ा जवाब देगी।
ऑटोमेटेड अलर्ट तकनीक पर आधारित है सिस्टम
यह प्रणाली ऑटोमेटेड अलर्ट तकनीक के साथ आती है, जो ड्रोन गतिविधि का पता लगते ही तुरंत अधिकारियों को सूचित करती है जिससे मैनुअल निगरानी की जरूरत नहीं रहती। इस उन्नत प्रणाली के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए बीएसएफ, भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल बनाए रखा जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, डीजीपी गौरव यादव और अन्य मौजूद थे।