सिख कौम के विभिन्न मुद्दों को लेकर पांच सिंह साहिबान की बैठक वीरवार को उस समय विवाद में घिर गई जब तख्त श्री पटना साहिब के निलंबित जत्थेदार इकबाल सिंह पांच सिंह सहिबान की बैठक में बैठ कर अलग-अलग मुद्दों के संबंध में फैसले लेते रहे जबकि ज्ञानी इकबाल सिंह को निलंबित किए जाने की सूचना पहले ही तख्त पटना साहिब प्रबंधक कमेटी के सचिव चरणजीत सिंह ने फोन पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को दी।
फिर बैठक शुरू होने से कुछ समय पहले फैक्स में माध्यम से भी श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय को भी भेज दी। बावजूद इसके ज्ञानी इकबाल सिंह पांच सिंह साहिबान के बीच बैठ कर विभिन्न मामलों पर चर्चा करते रहे। इस बैठक का विवाद तब और गहरा गया जब इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंचे श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह बैठक में इकबाल सिंह को बैठे देख वापस चले गए।
बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि बैठक में राजस्थान के गुरुद्वारा बुड्डा जोहड़ की कमेटी के सदस्यों को बार-बार श्री अकाल तख्त साहिब पर हाजिर होने को कहा गया, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए हैं। इस कमेटी के सदस्यों को आखिरी मौके देते हुए पांच सिंह साहिबान की अगली बैठक में पेश होने की आदेश दिए जाते हैं।
एक प्रश्न के जवाब में ज्ञानी गुरबचन सिंह ने स्पष्ट किया कि तख्त पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह बैठक में शामिल हुए हैं। परंतु उनके पास ऐसी कोई सूचना अभी तक नहीं पहुंची कि ज्ञानी इकबाल सिंह को पटना साहिब के प्रबंधक कमेटी ने पद से निलंबित कर दिया है। जत्थेदार गुरबचन सिंह ने कहा कि ज्ञानी इकबाल सिंह के अधिकार क्षेत्र में है कि वे प्रबंधक कमेटी के सदस्यों को सजा लगा सकते हैं।
ज्ञानी इकबाल सिंह सेवाएं समाप्त
तख्त पटना साहिब के निलंबित जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह की सेवाओं को तख्त पटना साहिब कमेटी की ओर से वीरवार को समाप्त कर दिया गया है। प्रबंधक कमेटी के महासचिव चरणजीत सिंह की ओर से अपने हस्ताक्षरों के साथ मीडिया को जारी एक पत्र में कहा कि 7 जनवरी 2014 को श्री गुरु ग्रंथ गोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर जत्थेदार इकबाल सिंह की ओर से तख्त साहिब पर जो माहौल पैदा किया गया था उसे से दुनिया भर के सिखों का अक्स प्रभावित हुआ है।
कमेटी ने भी दो बार ज्ञानी इकबाल सिंह को संदेश भेजे, लेकिन जत्थेदार की ओर से कोई भी जवाब और सहयोग नहीं दिया गया। इस कारण उनकी सभी सेवाओं को कमेटी की ओर से समाप्त कर दिया गया है।