कानून व डॉक्टरों की लड़ाई के कारण उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी के शव का पोस्टमार्टम दूसरे दिन किया गया। गुस्साए परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट शिवानी सांगा घटनास्थल पर पहुंचीं और मामले को शांत कराया।
धर्मेंद्र सिंह निवासी मजीठा रोड वर्ष 1997 से कत्ल के आरोप में केंद्रीय जेल में बंद था। टीबी की समस्या होने पर उसे टीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया। 23 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शनिवार को जेल प्रशासन शव का पोस्टमार्टम कराने गुरु नानक देव अस्पताल पहुंचा लेकिन समय अधिक होने के कारण रविवार को पोस्टमार्टम करने की बात कही गई।
मृतक के का बेटे ऋषभ ने डॉक्टरों पर आरोप लगाए कि रविवार नौ बजे से वह डॉक्टरों से शव का पोस्टमार्टम करने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जब तक ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं आते तब तक पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता। गुस्साएं परिजनों ने डॉक्टरों के खिलाफ बवाल खड़ा कर दिया। सूचना मिलने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। कानूनी कार्रवाई करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कर वारिसों के हवाले किया गया।
विभाग के मुखी डॉ. गुरमनजीत सिंह मान ने बताया कि कैदी का शव होने के कारण ड्यूटी मजिस्ट्रेट की वीडियोग्राफी करने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई होती है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के लेट होने के कारण शव का पोस्टमार्टम लेट हुआ।