अमृतसर। संत हरचंद सिंह लौंगोवाल की बरसी के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। नव गठित शिरोमणि अकाली दल ने अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के लिए गांव-गांव में अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने घोषणा की है कि गांव स्तर पर कमेटियां गठित की जाएंगी जिनके जरिये कार्यकर्ताओं और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना है बल्कि आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए वर्करों से फीडबैक भी लेना है।
नए अकाली दल की रणनीति नींव से सशक्तीकरण पर आधारित है। पार्टी ने गांव कमेटियों को अपनी रीढ़ मानते हुए कहा है कि इन इकाइयों के माध्यम से ही जनता की नब्ज समझी जा सकेगी। प्रत्येक गांव कमेटी में स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और युवाओं को जोड़ा जाएगा। इसके लिए जिला और हल्का स्तर पर जिम्मेदारियां बांटी जा रही हैं। नए गठित दल के नेताओं का मानना है कि पंजाब की राजनीति में इस समय किसान, मजदूर और नौजवान वर्ग की आवाज को महत्व देने की आवश्यकता है। यही वजह है कि संगठनात्मक विस्तार में किसानों और पंचायत स्तर के नेतृत्व को खास जगह दी जा रही है। पार्टी वर्करों से उपचुनाव को लेकर रायशुमारी की जा रही है। कई क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उपचुनाव लड़ने के हक में अपनी सहमति जताई है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अकाली दल बादल और शिअद (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान से जुड़े कई नेता इस नव गठित दल की लीडरशिप के संपर्क में हैं। सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में पंजाब की सियासत में एक वैकल्पिक अकाली मंच की जरूरत है। अगर इन नेताओं का समर्थन मिला तो नए अकाली दल की ताकत कई गुना बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की राजनीति लंबे समय से अकाली राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती रही है। शिअद (बादल) जहां लंबे समय तक सत्ता में रहा, वहीं सिमरनजीत सिंह मान का अकाली दल अपने धार्मिक और वैचारिक मुद्दों के कारण अलग पहचान बनाए हुए है। ऐसे में नव गठित शिरोमणि अकाली दल का उभार एक नई सियासी तस्वीर खींच सकता है। गांव कमेटियों की गठन प्रक्रिया शुरू होते ही कार्यकर्ताओं में जोश देखा जा रहा है। कई जगहों पर मीटिंग आयोजित की गईं जिनमें युवा वर्ग ने उत्साह दिखाया। पार्टी का दावा है कि संगठनात्मक ढांचे को आने वाले महीनों में पूरी तरह खड़ा कर दिया जाएगा।
पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर संभव
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपचुनाव में यह नया अकाली दल क्या रुख अपनाता है और कितने बड़े स्तर पर जनता को अपने साथ जोड़ पाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दल सही रणनीति और व्यापक गठजोड़ के साथ आगे बढ़ा तो पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर कर सकता है। पार्टी नेता चरणजीत सिंह बराड़ इस संबंध में कहते हैं कि अगर अकाली दल के दूसरे ग्रुपों के टकसाली नेता उनकी पार्टी में आती है तो उनका स्वागत है। इस से पार्टी मजबूत होगी।