पंजाब पुलिस का एक मुलाजिम डोप टेस्ट की फर्जी रिपोर्ट लेकर सिविल अस्पताल में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट लेने पहुंच गया। जब डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी तो पूछा अस्पताल में डोप टेस्ट बंद हैं, आप रिपोर्ट कहां से ले गए। इस पर पुलिसकर्मी ने जवाब दिया, बस बनवा ली यहां-वहां से। डॉक्टर के भड़कने पर कर्मचारी रिपोर्ट छोड़कर फरार हो गया।
पंजाब सरकार ने असलाह लाइसेंस धारकों और आवेदकों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य किया है। इसके लिए आवेदक का बाकायदा यूरिन सैंपल लेकर टेस्ट किया जाता है। इस पुलिस मुलाजिम ने डोप टेस्ट करवाया नहीं और कंप्यूटर के जरिये जाली रिपोर्ट निकलवा ली। यह रिपोर्ट हूबहू सरकारी रिपोर्ट जैसी थी। पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन के लेटरपैड पर मुलाजिम की तस्वीर लगी थी। डोप टेस्ट निगेटिव था और नीचे सिविल अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट की मुहर व हस्ताक्षर थे। सब कुछ एकदम असली जैसा था, लेकिन पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर अलग थे। रिपोर्ट पर ओपीडी नंबर भी गलत दर्ज था। यह रिपोर्ट किसी कंप्यूटर सेंटर से तैयार करवाई गई थी।
मुलाजिम की यह चालाकी कभी न पकड़ी जाती, अगर सिविल अस्पताल मेें डोप टेस्ट की प्रक्रिया बंद न की गई होती। टेस्टिंग किट्स खत्म होने की वजह से सिविल अस्पताल में पिछले एक माह से डोप टेस्ट नहीं हो रहे। यह मुलाजिम जब डोप टेस्ट की फर्जी रिपोर्ट लेकर सिविल अस्पताल में डॉक्टर के पास मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट लेने पहुंचा तो डॉक्टर ने डोप टेस्ट रिपोर्ट के बारे में पूछा। मुलाजिम ने झट से रिपोर्ट निकाली और टेबल पर रख दी। डॉक्टर का माथा ठनका। उन्होंने पूछा कि सिविल अस्पताल में तो टेस्ट हो नहीं रहे तो तुम रिपोर्ट कहां से ले आए? इस पर मुलाजिम ने बड़ी बेपरवाही से जवाब दिया, बस बनवा ली यहां-वहां से। यह सुनकर डॉक्टर ने उसे खरी खोटी सुनाई और अस्पताल के एसएमओ डॉ. चरणजीत सिंह को जानकारी दी। इसके बाद मुलाजिम रिपोर्ट टेबल पर ही छोड़कर फरार हो गया।
बता दें कि 2019 में पंजाब पुलिस का एक मुलाजिम अपनी पत्नी का यूरिन सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज स्थित नशा मुक्ति केंद्र में डोप टेस्ट करवाने पहुंच गया। उसकी यह कारस्तानी पकड़ी गई। डोप टेस्ट करने वाले स्टाफ ने एसएसपी देहाती को मामले की जानकारी दी थी। एसएसपी ने मुलाजिम को सस्पेंड कर दिया था। बता दें कि असलहा धारकों को निगेटिव रिपोर्ट के बाद ही लाइसेंस जारी होते हैं अन्यथा उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।
थाने में की गई शिकायत: एसएमओ
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा कि थाना रामबाग पुलिस को इस संबंध में शिकायत की गई है। साथ ही डीसीपी को लिखा गया है। जाली रिपोर्ट तैयार करने वाले मुलाजिम पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।