ड्रग कंट्रोलर पंजाब भाग सिंह ने कहा कि राज्य में जीवन रक्षक दवाओं का नशा के लिए हो रहा उपयोग रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है। यही कारण है कि राज्य के अंदर नई ड्रग नीति लागू करके 15 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में सिर्फ एक ही मेडिकल स्टोर खोलने की इजाजत दी जा रही है। इसी तरह जिस गांव में एक सेंट्रल हेल्थ सेंटर है वहां पर 7 से 10 मेडिकल स्टोर खोलने के लिए लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। प्राइमरी हेल्थ सेंटरों वाले गांवों में सात से अधिक मेडिकल स्टोर नहीं खोले जा सकते।
भाग सिंह सोमवार को अमृतसर फार्मा मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। इस दौरान फार्मा मैन्यूफेक्चरर ने उन्हें अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने कहा कि राज्य में 25 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर हैं। जिनको लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनकी चेकिंग के लिए राज्य में 44 ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि मेडिकल स्टोरों पर कोई भी गैर फार्मासिस्ट दवा न दे। इसकी चेकिंग के लिए भी सभी इंस्पेक्टर्स को विशेष हिदायतें जारी की गई है।
पिछले कुछ समय से मिल रही शिकायतों और अदालत के आदेशों को मुख्य रख कर होलसेल स्टोरों के लाइसेंस जारी करने बंद कर दिए गए हैं। शिकायतें मिलने वाले करीब 74 कैमिस्टों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। पिछले दो वर्षों में 500 से अधिक लाइसेंसों को सस्पेंड किया गया है। मेडिकल स्टोरों पर किसी भी कीमत पर दवाओं को नशा के रूप में बेचने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
इस दौरान फर्मा मैनूफेक्चरर एसोसिएशन के पदाधिकारियों प्रदीप बल्लगन, जुगल किशोर, रवि धवन, अमित कपूर, अजय शर्मा, सौरभ कक्कड़, पियूष शर्मा आदि ने समस्याओं के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर जोनल लाइसेंस अथॉरिटी राजेश सूरी, ड्रग इंस्पेक्टर अनुपमा कालिया, बलबीन कौर, अमरपाल सिंह और सुखदीप सिंह भी मौजूद थे।