संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पंजाब के खेतों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला नहरी पानी, कभी जमीन की कीमत तय करने में प्रमुख भूमिका निभाता था। अब बिजली के ट्यूबवेल के आने से माझा और दोआबा इलाकों से खेतों में जाने वाला नहरी पानी खत्म हो गया है। लगभग 30 वर्षों से बंद पड़े नहरी पानी सप्लाई सिस्टम को दोबारा शुरू किया जा रहा है। सिंचाई विभाग ने एक बार फिर छोटे खालों, नालियों और छोटी ड्रेनों का जीर्णोद्धार करने का फैसला लिया है। बता दें कि छोटी नहरों और ड्रेनों, खालों की जुताई कर किसानों ने अपने खेतों में मिला लिया था। इस व्यवस्था के बाद अब ब्यास और सतलुज का पानी माझा और दोआबा जिले के किसानों को सप्लाई किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के इंजीनियर कुलविंदर सिंह ने बताया कि नहर के पानी को टेल तक पहुंचाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेशों के बाद इस पर काम शुरू कर दिया है। प्रतिदिन गिर रहे भूमिगत जल स्तर पर ऊंचा उठाने के लिए अब नहरी पानी का उपयोग खेती के लिए बढ़ाने के आदेश हुए हैं। विभाग के मंत्री गुरमीत सिंह ने मीत हेयर और विभाग के सचिव कृष्ण कुमार की ओर से तय की गई योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। तीन दशक पहले पूरे पंजाब में नहर के पानी का कुशलता से उपयोग किया जा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे नलकूपों की संख्या बढ़ती गई और बिजली की आपूर्ति सामान्य होती गई, किसान ने नहर के पानी को खेतों में लाने के लिए मेहनत करना बंद कर दिया और पूरा भूजल सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने लगा। जिससे पंजाब के ज्यादातर इलाकों में जलस्तर 200 फुट से नीचे पहुंच गया है। कई इलाकों में खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है। आधा से अधिक पंजाब डार्क जोन में चला गया है। अमृतसर भी इसी डार्क जोन का हिस्सा है।
माझा और दोआबा में शत-प्रतिशत लोग नलकूपों पर आश्रित
माझा और दोआबा में लगभग शत-प्रतिशत लोग नलकूपों पर आश्रित हो गए हैं। जबकि मालवा में भूजल के भारी होने के कारण नहरों का पानी भी बचा हुआ है। किसानों ने किसी हद तक इसका उपयोग खेती के लिए शुरू कर दिया है। माझा और दोआबा में हालात यह हो गए हैं कि लोगों ने खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए बनी छोटी ड्रेनों को तोड़कर खेती के साथ जोत कर खेतों में ही मिला लिया है। उन्होंने कहा कि ड्रेनों की सफाई का काम किसानों को अपने स्तर पर करना पड़ता है और विभाग को नहरों और कट की सफाई करनी होती है, लेकिन फिलहाल हमारा पूरा जोर ड्रेनों को खोलने व चलाने पर लगा है। विभाग ने पुराने नक्शों को लेकर नए खाल व छोटी ड्रेनों को रिवाइव करना शुरू कर दिया है।
17184 नहरों में से 4000 नहरों का पुनर्निर्माण किया
इंजीनियर कुलविंदर सिंह ने बताया कि इस समय पूरे पंजाब में 17060 कर्मचारी और अधिकारी खेतों में काम कर रहे हैं। जिनमें एसडीओ, जेई, जिलेदार, पटवारी, बेलदार, मेट और क्लर्क शामिल हैं। अब तक बंद कर दी गई 17184 नहरों में से लगभग 4000 नहरों का पुनर्निर्माण किया जा चुका है। शेष पर काम चल रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि जून के अंत तक नहर का पानी हर खेत तक पहुंच जाएगा।
दो तरह से सीधा लाभ होगा
इंजीनियर कुलविंदर सिंह ने कहा कि इससे दो तरह से सीधा लाभ होगा, एक यह कि नहर के पानी का उपयोग केवल 20 प्रतिशत होता है और यह कीमती खजाना बर्बाद हो रहा है, उपयोग बढ़ने से नहर के पानी का व्यर्थ प्रवाह बंद हो जाएगा, दूसरा उपयोग है नहरी पानी के कारण ट्यूबवेल भी कम चलेंगे, जिससे भूमिगत जल की बचत होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यदि हम वर्तमान दर से धरती से पानी निकालते रहे तो वर्ष 2037 तक जल भंडार समाप्त हो जाएगा।