संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि आतंकवाद पंजाब में गंभीर मुद्दा रहा है। आज भी पंजाब में आतंकवाद से प्रभावित लोगों के जख्म भरे नहीं हैं, परंतु किसी भी पार्टी का कोई उम्मीदवार आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
प्रो. चावला ने कहा कि पंजाब में चार बड़ी पार्टियों समेत सैकड़ों प्रत्याशी संसद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि एक भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी उनकी चर्चा नहीं कर रही जिनको आतंकवाद के काले दिनों में ऐसे जख्म दिए गए हैं जो कई पीढ़ियां नहीं भूल सकतीं और जो चोट उनको आतंकवाद ने दी है उन परिवारों को पुन: अपना जीवन स्तर सुधारने में भी आधी सदी लग जाएगी। अफसोस की बात है कि केंद्र सरकार समेत पंजाब की राजनीतिक पार्टियों में एक बार भी उन लोगों के घावों पर मरहम लगाने की चर्चा नहीं की गई, जो पूरी तरह उजड़ गए।
प्रो. चावला ने कहा कि याद रखना होगा जितना दिल्ली में गैर इंसानी काम हुआ उतना ही पंजाब में भी हुआ, लेकिन देश के शासकों को और पंजाब के भी बहुत से नेताओं को यह याद ही नहीं कि पंजाब के कितने लोग बसों से निकालकर मारे गए। घरों से उठाकर अपहरण किया गया। पूरे के पूरे परिवार बच्चों के सामने ही गोलियों से भून दिए गए। कौन नहीं जानता कि हरिके पत्तन में एक छह माह की बेटी आतंकियों ने जूतों तले कुचल दी थी और एक गर्भवती महिलाओं को भी गोलियों से भूना था। अगर चुनाव के दिनों में ही चिंता नहीं की जा रही तो बाद में कौन करेगा।